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रत्न एवं आभूषण में चमक, जारी रहने की संभावना कम

रत्न एवं आभूषण में चमक, जारी रहने की संभावना कम

चालू वित्त वर्ष के पहले चार माह में रत्न एवं आभूषण निर्यात में लगभग 63 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी हुई है, पर यह रुख जारी रहने की संभावना नहीं है। आगामी महीनों में रत्न एवं आभूषण निर्यात की चमक घटेगी और वित्त वर्ष में निर्यात में कुल बढ़ोतरी 15 प्रतिशत पर सिमट सकती है।

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के चेयरमैन बसंत मेहता ने कहा कि कमजोर वैश्विक सुधार के चलते हम आगामी महीनों में निर्यात वृद्धि को लेकर सतर्क हैं। 2010-11 में निर्यात वृद्धि 15 प्रतिशत रह सकती है। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में बहुमूल्य धातुओं का निर्यात 63.4 प्रतिशत बढ़कर 11.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, इसकी वजह पिछले साल कम निर्यात वृद्धि (लो बेस इफेक्ट) है।

मेहता ने कहा कि सरकारों द्वारा दिए गए प्रोत्साहन पैकेजों से अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में स्थिति सुधर रही है। चूंकि अब वित्तीय एकीकरण पर ध्यान दिया जा रहा है, इसलिए इन बाजारों से मांग घटेगी। देश के कुल निर्यात में रत्न एवं आभूषणों का सबसे अधिक योगदान रहता है। 2009-10 में देश का कुल निर्यात 182 अरब डॉलर रहा था। इसमें रत्न एवं आभूषणों की हिस्सेदारी 28.41 अरब डॉलर रही थी।

पश्चिमी बाजारों में सुधार की गति धीमी है। ऐसे में निर्यातकों को चीन और पश्चिम एशिया से ऑर्डर मिल रहे हैं। जून माह में रत्न एवं आभूषणों के निर्यात में 74.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई थी, वहीं जुलाई में यह वृद्धि घटकर 40 प्रतिशत रह गई। देश के रत्न एवं आभूषण निर्यात में सबसे अधिक हिस्सेदारी संयुक्त अरब अमीरात की रहती है। रत्न एवं आभूषण के कुल निर्यात का 31 प्रतिशत यूएई को भेजा जाता है। इसके बाद हांगकांग का नंबर आता है।

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