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माओवादियों का दावाः रविवार को बंधक पुलिसकर्मियों को छोड़ेंगे

माओवादियों का दावाः रविवार को बंधक पुलिसकर्मियों को छोड़ेंगे

प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के स्वयंभू प्रवक्ता अविनाश ने सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकराते हुए कहा कि बंधक बनाए गए तीनों पुलिसकर्मियों को रविवार को उनके परिवारों के सदस्यों को सौंप दिया जाएगा।

बिहार सरकार द्वारा शनिवार को पटना में आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद एक टीवी चैनल के जमुई स्थित स्थानीय पत्रकार को फोन पर सूचना देते हुए अविनाश ने सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया और कहा कि इन बंधकों को वह पुलिस को सौंपने के बजाए रविवार सुबह आठ बजे तक उनके परिवार के सदस्यों को सौंप देंगे।

यह पूछे जाने पर क्या वह मीडियाकर्मियों के समक्ष बंधकों को उनके परिवार को सौंपेंगे अविनाश ने कहा कि इसकी जानकारी भी वह संवाददाताओं को नहीं देंगे कि बंधकों के परिवार को वे कहां बुलायेंगे और उन्हें कहां छोड़ रहे हैं। अविनाश से पूछे जाने पर कि लुकस टेटे का क्या कसूर था कि उनकी हत्या कर दी गई उसने कहा कि उनकी मौत का अफसोस नहीं है क्योंकि उन्होंने एक पुलिस अधिकारी की हत्या की है।

नक्सली प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने बंधकों की रिहाई के लिए उनके साथ बातचीत करने की बजाए सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन सहित अन्य सुरक्षा बलों को उनकी टोह लेने के लिए लगा रखा था। सरकार ने धमकी थी कि बंधकों को नहीं छोड़ने पर पुलिस की कार्रवाई होगी इसे चुनौती के तौर पर स्वीकार करते हुए लुकस की हत्या कर दी गई।

नक्सली प्रवक्ता ने कहा कि टेटे आदिवासी समाज से जरूर थे पर एक पुलिसकर्मी और सरकार का प्रतिनिधि होने के नाते उसकी हत्या कर दी गई। उसने यह भी कहा कि सरकार बिहार के विभिन्न जेलों में बंद उनके आठ साथियों जय पासवान, विजय चौरसिया, प्रेम भूषण, प्रमोद बर्नवाल, रामविलास तांती, रमेश तिर्की, अर्जुन कोड़ा और रत्तू कोड़ा को मुक्त करे। सरकार उनकी मांग को पूरा करने की बजाए कार्रवाई की धमकी दे रही थी जिसकी वजह से चेतावनी देने के लिए टेटे की हत्या की गई ।

नक्सलियों को घेर लेने का सरकार के दावे के बारे में पूछे जाने पर अविनाश ने कहा कि पुलिस उन्हें कभी घेर नहीं पाई है। सर्वदलीय बैठक में सरकार ने नक्सलियों से आमने-सामने आकर वार्ता करने की पेशकश की थी। इस निर्णय पर अविनाश ने कहा कि नीतीश सरकार और खून-खराबा की मंशा रखती है और इसका राजनीतिक लाभ उसे वह नहीं उठाने देंगे इसलिए उनकी कमेटी ने बंधकों को न तो सरकार और न ही पुलिस बल्कि उनके परिजनों को सौंपने का फैसला लिया है।

उल्लेखनीय है कि गत 29 अगस्त को लखीसराय जिले के कजरा थाना क्षेत्र के शीतलाकोरासी पंचायत स्थित रामटालनगर गांव के समीप हुई मुठभेड में सात पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे तथा माओवादियों ने पुलिस के 35 हथियारों लूटते हुए चार पुलिसकर्मियों का अपहरण कर लिया था।

माओवादियों ने बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों में से एक लुकस टेट की शुक्रवार प्रात: हत्या कर दी थी। शेष तीन बंधक अवर निरीक्षक रूपेश कुमार और अभय प्रसाद यादव तथा बीएमपी हवलदार एहतेशाम खान अब भी नक्सलियों के चंगुल में है। नक्सलियों द्वारा तीनों बंधकों को मुक्त किये जाने की सूचना के बारे में पूछे जाने पर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने कहा कि इसबारे में उन्हें कोई जानकारी आधिकारिक तौर नहीं प्राप्त हुई है।

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