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डेंगू की स्थिति बहुत बेकाबू नहीं है

बरसात के सीजन में शुरू होने वाला डेंगू सर्दियों तक पीछा नहीं छोड़ता है। देश भर में अब तक सात हजार से ज्यादा लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। देश की राजधानी जहां सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं हैं, वहां भी एक हजार से ज्यादा लोग डेंगू की चपेट में हैं और कई मौतें हो चुकी हैं। कॉमनवेल्थ खेल सिर पर हैं। कई देशों ने डेंगू के बढ़ते मामलों पर चिंता जाहिर की है और हो सकता है कि कुछ देश डेंगू के चलते इन खेलों में भाग ही नहीं लें। इसलिए सरकार की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इन सब मुद्दों पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद से रूबरू हुए विशेष संवाददाता मदन जैड़ा-

दिल्ली में इस बार अचानक डेंगू के मामले क्यों बढ़े ?
दिल्ली में इससे पहले कहीं ज्यादा डेंगू मामले हुए हैं। प्रत्येक चार साल में डेंगू फैलने का चक्र रिपीट होता है। फिर दिल्ली में मेट्रो और कॉमनवेल्थ खेलों के कारण निर्माण कार्य ज्यादा हुए हैं। दूसरे बारिश ज्यादा हो रही है, इसलिए इस बार अगस्त में एकाएक मामले बढ़े हैं।

इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार क्या कर रही है ?
सरकार दिल्ली समेत सभी राज्यों को डेंगू की जांच के लिए आवश्यक टेस्ट किट, डेंगू मच्छर के लारवा को मारने वाली दवाएं और अन्य संसाधन उपलब्ध करा रही है। राज्यों से स्वच्छता अभियान में तेजी बरतने को कहा गया है। मीडिया के जरिये सरकार प्रचार अभियान चला रही है ताकि लोग कूलरों में पानी जमा नहीं होने दें। छतों पर टंकियों को ढक कर रखें और आसपास जहां भी पानी जमा है, वहां दवा के छिड़काव के लिए कहें। दिल्ली में हमने नगर निगम और एनडीएमसी को कॉल सेंटर स्थापित करने को कहा है, ताकि लोग पानी जमा होने की शिकायत कर सकें।

साथ ही भय से भी निपटना जरूरी है?
भय की वजह मीडिया है और इससे निपटने में मीडिया ही मदद कर सकता है। सरकार भी मीडिया में विज्ञापनों के जरिये ऐसा अभियान चला रही है। लोगों को भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि दिल्ली या देश भर में जो डेंगू सब-टाइप-1 सक्रिय है, वह सबसे कम खतरनाक है। इसका संक्रमण तेजी से होता है, लेकिन इसमें मृत्यु का खतरा बहुत कम रहता है। इसका उपचार संभव है।

कभी डेंगू, कभी स्वाइन फ्लू, कभी जापानी इन्सेफेलाइटिस। इनसे निपटने की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं है?
संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है। डेंगू, मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए भी बैक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम है। कई राज्य इसमें अच्छा कार्य कर रहे हैं। डेंगू की स्थिति बेकाबू नहीं है। यह नियंत्रण में है। दिल्ली में डेढ़ करोड़ आबादी में एक हजार डेंगू रोगी कोई बड़ी समस्या नहीं है। सबका इलाज हो रहा है। स्वाइन फ्लू नई बीमारी है। फिर भी सरकार ने इसे बड़े स्तर पर फैलने से रोका।

डेंगू का असर कॉमनवेल्थ खेलों पर पड़ सकता है?
इस बार बारिश ज्यादा हो रही है, लेकिन अब निर्माण कार्य करीब-करीब पूरे हो रहे हैं। उम्मीद है कि बारिश की गतिविधियां भी घटेंगी। इससे मामले घटने शुरू हो जाएंगे। फिर सरकार ने दिल्ली में इसकी रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर प्रयास शुरू किए हैं। इसलिए उम्मीद है कि कॉमनवेल्थ खेलों तक डेंगू मामले कम हो जाएंगे।

कुछ देशों ने अपने खिलाड़ियों के लिए डेंगू के खतरे की एडवाइजरी जारी की है?
डेंगू भारत में ही नहीं, अन्य देशों में भी है। किसी भी देश में कोई बीमारी होती है, तो ऐसी ट्रेवल एडवाइजरी  आम बात है और उचित भी है, ताकि वे व्यक्तिगत स्तर पर बीमारी के प्रति सतर्क रहेंगे। खेल स्थलों, खिलाड़ियों के ठहरने के स्थलों पर डेंगू से बचाव के तमाम उपाय किए जा रहे हैं।

आम लोग इससे कैसे बचें?
डेंगू की रोकथाम में 90 प्रतिशत भूमिका आम लोगों की है। वे यदि जागरूक हों तो इसे रोकने में काफी मदद कर सकते हैं। घर या आसपास स्वच्छ पानी जमा होने से रोककर वे डेंगू फैलने से रोक सकते हैं। दूसरे, वे डेंगू की रोकथाम में सरकारी कार्मिकों की मदद करें।

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