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रंग लाएगी कृष्णा की मेहनत और त्याग

रंग लाएगी कृष्णा की मेहनत और त्याग

कॉमनवेल्थ के लिए कृष्णा पूनिया का लक्ष्य 64 मीटर कृष्णा पूनिया जब जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में राष्ट्रमंडल खेलों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में अपना भाग्य आजमाने उतरेंगी तो पूरे देश के साथ-साथ नौ साल का एक बच्चा भी उन्हें हसरत भरी निगाहों से निहार रहा होगा। यह कोई आम दर्शक नहीं बल्कि कृष्णा का बेटा लक्ष्य राज है जो करीब साढ़े सात साल से अपनी मां से इसलिए दूर रह रहा है ताकि वह अपना सपना पूरा कर सके। कृष्णा और उनके पति व कोच वीरेंद्र पूनिया जानते हैं कि सफलता हासिल करनी है तो कड़ी मेहनत और त्याग करना पड़ता है, लेकिन बेटे से अलग रहना मुश्किल काम है। लक्ष्यराज जब डेढ़ साल का था तब से वह अपनी दादी और जयपुर में चाचाओं के पास रह रहा है। जबकि कृष्णा और वीरेंद्र प्रतियोगिताओं और शिविरों के चलते देश विदेश घूमते रहते हैं।

कृष्णा इन दिनों पटियाला में ट्रेनिंग कर रही हैं। वीरेंद्र कहते हैं इस साल कृष्णा के प्रदर्शन को देखते हुए पूरा भरोसा है कि वह पदक जीतेगी, लेकिन पदक के रंग के बारे में अभी कुछ कहना बहुत मुश्किल है। लेकिन कृष्णा को पूरी उम्मीद है कि वह अक्टूबर में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल रहेंगी और सोने का तमगा उनके गले में होगा। अभ्यास में वह अभी 63 मीटर के करीब की दूरी छू रही हैं। जबकि उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 63.69 मीटर है जो उन्होंने इसी वर्ष अप्रैल में अमेरिका के सैन डिएगो में किया था। इस वर्ष उन्होंने तीनों एशियन ग्रांप्री मीट में स्वर्ण पदक जीते जबकि दिल्ली में पिछले माह हुई एशियाई ऑल स्टार मीट में 60.93 मीटर से पहला स्थान पाने में सफल रहीं। उनको अमेरिका में 75 दिनों की ट्रेनिंग के दौरान पूर्व ओलंपिक चैंपियन मैक विलकिंस ने मदद की थी। विलकिंस के सुझावों से कृष्णा को काफी लाभ हुआ था। उन्होंने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में 64 मीटर का लक्ष्य तय कर रखा है।
कृष्णा जानती हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों में कड़ा मुकाबला होगा। उनका मुकाबला विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया की डेनी सैमुअल्स (65.69 मी.) और दक्षिण अफ्रीका की इलिंजा नाउडे (64.49 मी.) से है। मौजूदा प्रदर्शन के लिहाज से कृष्णा तीसरे स्थान पर हैं। वीरेंद्र ने बताया कि सुबह शाम ट्रेनिंग के अलावा वे दोनों प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों की वीडियो देख रहे हैं। उन्होंने माना कि राष्ट्रमंडल खेल अपनी सरजमीं पर होने का मेजबान एथलीटों को लाभ मिलेगा। साथ ही वह यह कहना भी नहीं भूलते कि घरेलू दर्शकों के बीच पदक जीतने का उन पर दबाव भी रहेगा। कृष्णा ने कहा कि भारत में पदक जीतने का अनुभव खास होगा।

कृष्णा को इस वर्ष अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। वह और वीरेंद्र 29 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में होने वाले समारोह के लिए बेहद रोमांचित भी हैं। उसके बाद सितंबर में उनकी विदेश में ट्रेनिंग करने की योजना है ताकि खेलों के समय तक वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फार्म में आ सकें। 2006 दोहा एशियाई खेलों में और 2009 गुआनझू एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकीं कृष्णा को अपनी मेहनत व त्याग का फल मिलने का बेसब्री से इंतजार है।

 

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