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आज तक पूरा नहीं हुआ इनाम का वादा

1970, 74 के स्वर्ण और 78 के रजत विजेता सुदेश पहलवान

भारतीय पहलवानों ने कॉमनवेल्थ खेलों में खूब पदक जीते हैं। बिड़ला व्यायामशाला के पहलवान सुदेश कुमार इनमें से एक हैं। उन्होंने लगातार तीन कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीते हैं। 1970 और 74 में स्वर्ण और 1978 में रजत पदक। लेकिन देश में कॉमनवेल्थ खेल हो रहे हैं और सुदेश आयोजन से कहीं जुड़े हुए नहीं हैं। इससे दुखी होकर उन्होंने कहा, ‘मैं कॉमनवेल्थ खेलों में दो बार का स्वर्ण विजेता हूं। मेरे शहर में ये खेल हो रहे हैं, लेकिन मुझे किसी भी कमेटी में नहीं रखा गया। यह क्या दर्शाता है?’ अपने शानदार प्रदर्शन पर सुदेश ने कहा, ‘हमारे जमाने के पहलवान बहुत मेहनत करते थे। उस समय सुविधाएं नहीं होती थीं। हम देश में मिट्टी और विदेश में मैट पर लड़ते थे। ऐसे में पदक जीतना आसान नहीं था। लेकिन हमारी मेहनत इस कमी को दूर कर देती थी।’ उस समय कॉमनवेल्थ खेलों में कैसा मुकाबला होता था? सुदेश ने कहा, ‘उस समय कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के पहलवान बहुत तगड़े हुआ करते थे। जब मैं स्वर्ण के साथ लौटा तो आज की तरह से धनवर्षा नहीं हुई थी। बस किसी ने खाना खिला दिया और किसी ने 500 रुपये देकर सम्मान कर दिया। इससे ज्यादा कुछ नहीं। उस समय के चीफ एक्जीक्यूटिव काउंसलर विजय कुमार मल्होत्र ने लुडलो कैसल स्कूल में एक समारोह में मुङो और वेदप्रकाश पहलवान को पाच-पांच हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी, लेकिन वे इनाम आज तक नहीं मिला है।’सुदेश ने कहा, ‘हमारा ध्यान तो बिड़ला व्यायामशाला में गुरु हनुमान और के.के. बिड़ला जी के साथी मुरलीधर डालमिया ही रखा करते थे।
डालमिया जी हमारी खुराक के लिए धन भिजवाया करते थे। एक बार गुरुजी पेरिस से गद्दे का एक टुकड़ा अपने साथ लाए और उसे इंदिरा गांधी जी के पास  दिखाने ले गए। इंदिरा जी ने संजय गांधी को बुलाया तो वह डबलरोटी का पीस हाथ में लेकर ही दौड़े आए थे। उनसे कहा गया कि ऐसा गद्दा मंगवाना है। बस तुरंत गद्दे बनाने वाली कंपनियों को बुलाया गया, लेकिन सभी ने कहा कि इसे यहां बनाया नहीं जा सकता। इसके बाद खेल विभाग के संयुक्त सचिव को बुलाकर कहा गया कि ऐसा गद्दा मंगवाओं। वह फ्रांस जाकर बुकिंग करा आए और फिर एक माह बाद गद्दे आए तो एयरपोर्ट पर रोक दिए गए। गुरुजी को संदेश मिला कि एक लाख रुपये जमा कराओ। गुरुजी ने संजय गांधी से कहा तो उन्होंने तुरंत कस्टम कलेक्टर को आदेश दिया कि गद्दे लेकर गुरु हनुमान अखाड़ा पहुंचो। इस तरह से गद्दे हमारे अखाड़े में ही सबसे पहले आए थे। इसका पहलवानों को बहुत लाभ मिला। संजय गांधी आज होते तो कॉमनवेल्थ खेलों में जो लेट-लतीफी चल रही है वो नहीं होती।’ इस बार पहलवानों से कितनी उम्मीद है?

सुदेश ने कहा, ‘हमारे पहलवान फ्रीस्टाइल में कम से कम चार स्वर्ण पदक जरूर जीतेंगे। सुशील, योगेश्वर, नरसिंह बहुत ही बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हैं।’ कुश्ती की कमियों पर सुदेश ने कहा दो टूक कहा, ‘देखा जाए तो हमारी बुनियाद ही गलत है। फेडरेशन उन्हें अपने पास रखती है जो चमचागिरी करते हैं।

मैं कुश्ती का सरकारी ऑबजर्वर रहा हूं, लेकिन जैसे ही मैंने गलत कामों को
उजागर किया मंडेर एंड कंपनी ने मुझे हटवा दिया। चमचों के साथ कुश्ती की तरक्की नहीं हो सकती।’

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