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उत्तर प्रदेश में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी अब होंगे स्थायी

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1991 से पहले प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 27 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में शनिवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गये निर्णय के अनुसार स्थानीय निकाय, आवास विकास परिषद तथा अन्य विभागों में वर्ष 1991 से पहले भर्ती हुए दैनिक वेतन भोगी तथा अस्थाई कर्मचारियों को स्थायी किये जाने का निर्णय लिया गया है।

प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना विजय शंकर पांडेय ने सरकार द्वारा लिए गये इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया कि सरकार के इस निर्णय से 26,800 दैनिक वेतन भोगी और अस्थाई कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
 उन्होंने बताया कि आज लिए गये इस फैसले से राज्य सरकार पर 80 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।

पांडेय ने बताया कि इन अस्थाई कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए अतिरिक्त पदों का सृजन किया जाएगा। प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में दस हजार अस्थाई और 9,800 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्ष 1991 के पहले से कार्यरत हैं, जबकि 3,000 वेतनभोगी कर्मचारी स्थानीय निकायों में तथा चार हजार दैनिक भोगी व अस्थाई कर्मचारी आवास विकास परिषद और विभिन्न विकास प्राधिकरणों में काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा शनिवार को लिए गये इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य सराकर पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पडे़गा, जबकि स्थानीय निकाय, आवास विकास परिषद तथा प्राधिकरणों पर 60 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकाय, आवास विकास परिषद तथा प्राधिकरणों में कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों को न्यायालय के आदेश से स्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के समान वेतन दिया जा रहा है।

पांडेय ने बताया कि अस्थाई कर्मचारियों द्वारा पिछले दशकों से स्थायी किये जाने की मांग को लेकर आये दिन धरना-प्रदर्शन किये जा रहे थे। उन्हें स्थायी करने के लिए न्यायालयों में भी हजारों मामले विचाराधीन थे जिसके कारण न केवल कर्मचारियों आर्थिक बोझ आ रहा था, बल्कि सरकार को इस पर काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा था।

उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों को अस्थाई से स्थायी करने की समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने 29 जून 1991 से दैनिक वेतनभोगी और वर्कचार्ज कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी।

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