DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बंधक पुलिसकर्मियों का अबतक सुराग नहीं, अभियान जारी

बिहार के लखीसराय जिले के कजरा थानान्तर्गत शीतलाकोरासी पंचायत के रामटालनगर गांव के पास गत 29 अगस्त को हुई मुठभेड़ के बाद चार पुलिसकर्मियों का अपहरण करने वाले नक्सलियों का अभी कोई सुराग नहीं लग पाया है और उनकी धरपकड़ के लिए शनिवार को छठे दिन भी तलाशी अभियान जारी है।

बिहार के पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने बताया कि मुठभेड़ के बाद मुठभेड़ स्थल लखीसराय, मुंगेर और जमूई के सीमावर्ती पहाडी क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी था, लेकिन अब इसका दायरा बांका और कैमूर जिलों तक बढा़ दिया गया है। उन्होंने हालांकि सुरक्षा कारणों से तलाशी अभियान में लगाये गए सुरक्षा बलों की संख्या का खुलासा करने से इंकार करते हुए केवल इतना बताया कि इस अभियान में लगाये गए सुरक्षा बलों की संख्या पर्याप्त है।

उन्होंने कहा कि उक्त क्षेत्र में पहाड़ और जंगल होने के कारण अभियान में अधिक समय लग रहा है। उक्त मुठभेड़ जिसमें सात पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे तथा माओवादियों ने 35 हथियार लूट लिए गए थे, के मुख्य साजिशकर्ता के बारे में पूछे जाने पर नीलमणि ने कहा कि अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। इस बीच पुलिस ने शनिवार सुबह जमूई के शहरी इलाके में स्थित एक टेलीफोन बूथ से अपने साथियों से बात कर रहे पिंकी यादव सहित दो संदिग्ध नक्सलियों को हिरासत में ले लिया।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि लखीसराय में तलाशी अभियान में और तेजी लाने के लिए केंद्र द्वारा दो हेलीकाप्टरों सहित 200 अतिरिक्त सुरक्षा बल यहां भेजे गए हैं। माओवादियों द्वारा बंधक बनाए गए चार पुलिसकर्मियों में से एक बीएमपी के अवर निरीक्षक लूकस टेटे का गोलियों से छलनी शव लखीसराय जिले के चानन थाना क्षेत्र के सिमरातल्ली कोरासी स्थित एक कच्ची सड़क पर पडा़ मिला था। नक्सलियों ने टेटे के शव के पास एक हस्तलिखित पर्चा छोडा था, जिसमें उन्होंने राज्य के विभिन्न जेलों में बंद अपने आठ साथियों को रिहा नहीं किए जाने पर बाकी बंधक पुलिसकर्मियों की भी हत्या करने की धमकी दी थी।

उल्लेखनीय है कि गत 29 अगस्त को लखीसराय जिले के कजरा थाना क्षेत्र के शीतलाकोरासी पंचायत स्थित रामटालनगर गांव के समीप हुई मुठभेड़ में सात पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे तथा माओवादियों ने चार पुलिसकर्मियों का अपहरण कर लिया था। माओवादियों द्वारा अपहृत पुलिसकर्मियों के नाम अवर निरीक्षक रूपेश कुमार, अभय प्रसाद यादव, लुकस टेटे तथा बीएमपी हवलदार एहतशाम खान शामिल हैं।

नक्सलियों ने इन बंधकों को छोडे़ जाने के एवज में पहाडी़ क्षेत्रों में मौजूद अपने साथियों को सुरक्षित बाहर निकलने देने तथा बिहार के विभिन्न जेलों में बंद उनके आठ साथियों जय पासवान, विजय चौरसिया, प्रेम भूषण, प्रमोद बर्नवाल, रामविलास तांती, रमेश तिर्की, अर्जुन कोडा़ और रत्तू कोडा़ की रिहाई की शर्त रखी है। माओवादियों ने अपनी मांगें माने जाने के लिए कल दिन के दस बजे तक की समयसीमा निर्धारित की थी।

नक्सलियों के स्वयंभू प्रवक्ता अविनाश ने गत दो सितंबर को अपराह्न चार बजे दावा किया कि सरकार द्वारा उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण उन्होंने बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों में से एक अभय प्रसाद यादव की हत्या कर दी है। पुलिस ने बंधक बनाए गए एक अन्य पुलिसकर्मी लुकस टेटे का शव तो बरामद किया, लेकिन अभय यादव सहित अन्य बंधकों के बारे में अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। मीडिया को नक्सलियों की गतिविधियों के बारे में जानकारी दो सितम्बर की देर शाम तक ही मिल पायी, क्योंकि अविनाश ने उसके बाद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को फोन करके अपनी आगे की रणनीति के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी।

ऐसे में नक्सलियों द्वारा कल सुबह दस बजे निर्धारित नयी समयसीमा समाप्त होने के बाद माओवादियों ने बाकी बचे बंधकों का क्या किया इसबारे में कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गत दो सितंबर को इस मामले में नक्सलियों से बातचीत करने के लिए तैयार होने की बात कही थी, लेकिन सरकारी स्तर पर नक्सलियों से संपर्क साधा गया या नहीं इस बारे में आधिकारिक तौर कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। इस बीच बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री नरेंद्र सिंह को कल देर शाम जमूई जिले में देखा गया था।

सिंह की जमूई में मौजूदगी से यह चर्चा जोरों पर है कि वह संभवत: सरकार की ओर से नक्सलियों से वार्ता के लिए वहां गए हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है। वहीं दूसरी तरफ नक्सल निरोधी अभियान की निगरानी कर रहे पुलिस महानिरीक्षक [अभियान] केएस द्विवेदी ने बताया कि बंधक बनाए गए बाकी पुलिसकर्मियों की रिहाई के लिए सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, एसटीएफ, सैप और बिहार सैन्य बल द्वारा संयुक्त रूप से व्यापक अभियान शुरू किया गया है।

सीआरपीएफ की कोबरा टीम द्वारा बीएसएफ के हेलीकाप्टर की मदद से उक्त पहाडी़ इलाके में नक्सलियों की टोह लेने का प्रयास जारी है। बिहार सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए केंद्र से केंद्रीय बलों की 40 दस्तों की मांग की है।

नक्सलियों के पुलिस को चकमा देकर मुंगेर के जंगली इलाके होते हुए पडो़सी राज्य झारखंड भाग जाने की संभावना को देखते हुए बिहार पुलिस ने झारखंड पुलिस को भी सतर्क कर दिया है और लगातार उसके संपर्क में है। पुलिसकर्मियों के अपहरण के बाद उत्पन्न स्थिति से निपटने में बिहार सरकार के नाकाम रहने के विपक्षी दलों के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मसले पर विचार-विमर्श के लिए शनिवार पटना में अपराह्न चार बजे एक सर्वदलीय बैठक बुलायी है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बंधक पुलिसकर्मियों का अबतक सुराग नहीं, अभियान जारी