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स्कूल का माहौल भयमुक्त होना चाहिए: मनमोहन

स्कूल का माहौल भयमुक्त होना चाहिए: मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि शिक्षा का अधिकार [आरटीई] को व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के लिए स्कूल का माहौल भय, चिंता और दहशत से मुक्त होना चाहिए।

कठोर सजा की कुछ घटनाओं का बच्चों के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ने का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा आरटीई अधिनियम में मानसिक प्रताड़ना और दैहिक दंड पर प्रतिबंध है। इसमें बच्चों को जबरन रोकने या उनके निष्कासन पर भी रोक है। इन प्रावधानों के चलते कई शिक्षक सवाल कर रहे हैं कि कक्षा में अनुशासन किस प्रकार बनाये रखा जाए।

शिक्षक दिवस से पूर्व, अपने आवास पर राष्ट्रीय अवार्ड विजेता शिक्षकों को संबोधित कर रहे प्रधानमंत्री ने कहा कि स्कूल जाने का विचार आते ही किसी भी बच्चे को भय महसूस नहीं होना चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति, लिंग या समुदाय का हो। हर साल पांच सितंबर को पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकष्णन की जयंती पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि कक्षा में अनुशासन बनाए रखने संबंधी मुद्दे का जवाब दार्शनिक जिद्दू कष्णामूर्ति ने दिया है। मनमोहन सिंह के अनुसार, कष्णामूर्ति ने कहा है कि अनुशासन छात्र को नियंत्रित करने का आसान उपाय है, लेकिन इससे उसे अपने आसपास की समस्याओं को समझने में मदद नहीं मिलेगी। अगर शिक्षक हर बच्चे पर पूरा ध्यान दे, उन पर नजर रखे, उनकी मदद करे तो किसी भी तरह के अनुशासन की, बाध्यता की या उस पर हावी होने की जरूरत नहीं होगी।

सभी बच्चों को स्तरीय शिक्षा प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करने का समय आ चुका है कि देश में हर बच्चों को स्तरीय शिक्षा पाने का अधिकार है और आरटीई को व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में शैक्षिक प्रणाली एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच तथा परंपरा और निरंतरता के बीच संतुलन बनाने एवं दूसरी ओर नवोन्मेषी पहल करने और बदलाव लाने की जरूरत पर जोर दिया।

शिक्षा संबंधी सुधारों में और देश के सर्वाधिक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में शिक्षकों को अग्रणी भागीदार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुख की बात है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में नीति निर्माण, प्रशासन और प्रबंधन की प्रक्रिया से शिक्षकों को अक्सर अलग रखा जाता है। और तो और दिन प्रतिदिन की निर्देशात्मक रणनीतियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी उन्हें शामिल नहीं किया जाता।

मनमोहन सिंह ने कहा कि शिक्षा संबंधी सुधार के हिस्से के तौर पर शिक्षकों को अधिकार संपन्न बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए जिसके तहत शिक्षा के विकास और सुधारों के लिए नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल करने का मौका हो। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि सभी शिक्षक रचनात्मक और प्रतिभावान लोग हैं। जब उन्हें सम्मान दिया जाता है और कक्षाओं में उनके काम के बारे में निर्णय लेने में शामिल किया जाता है तो उनकी प्रतिक्रिया उल्लेखनीय रहती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब शिक्षकों को पाठयक्रम तैयार करने, उसे विकसित करने, शिक्षण सामग्री बनाने, उसका चयन करने आदि में शामिल किया जाता है तो उनका अपना बौद्धिक एवं व्यावहारिक विकास भी होता है। बहरहाल, उन्होंने यह भी कहा कि सभी शिक्षकों को शिक्षा प्रणाली के स्तर और उसके समावेशी होने पर ध्यान देना चाहिए।
 उन्होंने कहा छात्रों की पहुंच बढ़ाने, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा में सीखने और उसे आत्मसात करने की प्रक्रिया को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षक शिक्षा अधिकारिता भी महत्वपूर्ण है। महिला शिक्षकों के मामले में यह बिल्कुल सच है जिन्हें हमारे समाज में व्यापक स्तर पर एक सकारात्मक उदाहरण पेश करना चाहिए।

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