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वी आर फैमिली

वी आर फैमिली

कहानी: कनाडा में रहने वाले एक फैशन फोटोग्राफर अमन (अर्जुन रामपाल) को अपनी पत्नी  माया (काजोल) और बच्चों आलिया (आंचल मुंजाल), अंजलि (दीया सोनेचा), अंकुश (नोमिनाथ) से अलग हुए तीन साल हो चुके हैं। अब वह श्रेया (करीना कपूर) से शादी करना चाहता है। श्रेया उसके बच्चों के साथ दोस्ती बढ़ाने लगती है, लेकिन ये बात माया को पसंद नहीं आती। माया अमन को वकील के पास जाने की धमकी देती है। अमन श्रेया को बच्चों से दूर रहने को रहता है तो वह उसे छोड़ कर चली जाती है। एक दिन अमन को पता चलता है कि माया को सर्वाइकल कैंसर है और वह जल्द ही मरने वाली है। ऐसे में माया के कहने पर श्रेया उसके साथ रहने लगती है और उसके बच्चों को संभालती है। 

निर्देशन : करण जौहर की फिल्मों का एक सेट फॉर्मूला है, जो उनकी लगभग हर फिल्म में दिखाई देता है। निर्देशक कोई भी हो उनके ‘सो कॉल्ड’ फार्मूलों की छाप उनकी फिल्मों में जरूर दिखाई देती है। इन फॉर्मूलों से सिद्धार्थ भी नहीं बच पाए। काजोल-करीना के बीच हॉस्पिटल में टू मच इमोशनल सीन ‘कल हो ना हो’ के क्लाईमैक्स की याद दिलाता है। फोटोग्राफ्स से घर सजाना, स्क्रीनप्ले में उनका इस्तेमाल, गीतों का फिल्मांकन और उनकी थीम, कॉस्ट्यूम डिजाइन सरीखी चीजों में भी करण की पिछली फिल्मों की छाप मिलती है। रही-सही कसर ‘स्टेपमॉम’ की मूल कहानी और स्क्रीनप्ले ने पूरी कर दी, जिसे ज्यादातर लोग पहले से देख चुके होंगे। फिर भी सिद्धार्थ ने फिल्म का सेकेंड हाफ काफी बढ़िया बनाया है।   

अभिनय : ‘माई नेम इज खान’ के बाद एक बार फिर काजोल ने बेहतरीन अभिनय किया है। अपने तीन बच्चों के सामने दम तोड़ती एक बेबस मां का किरदार उन पर फबता भी है। लगता है कि करीना कपूर ने ये फिल्म अपने अभिनय की आत्म संतुष्टि के लिए की है। उनका किरदार जितने बैंलेस के साथ लिखा गया है, उन्होंने उसी लय के साथ उसे निभाया भी है। काजोल के सामने उनकी सांसें सहमी हुई सी लगती हैं, लेकिन जिन सीन्स में वे बच्चों के साथ दिखाई गयी हैं, उनमें परिपक्वता और एक तरह का चार्म दिखाई देता है। अर्जुन रामपाल ने दो रिश्तों के झंझावात में उलझे एक इंसान के चरित्र को अच्छे से कैरी किया है। टीनएज बेटी के रूप में आंचल मुंजाल (आलिया) ने काजोल-करीना के सामने भी आत्मविश्वास दिखाया है। दीया सोनेचा (अंजलि) की मासूमियत मन मोह लेती है और नोमिनाथ (अंकुश) ने कम बोल कर भी फैमिली में अपनी जगह दर्शाई है। 

गीत-संगीत : इलविस प्रेस्ले का फेमस गीत ‘जेल हाउस रॉक’ की तर्ज पर बना ‘दिल खोल के लेट्स रॉक’ में थिरकन है। ‘रहमो करम’ गीत काफी अच्छा है, लेकिन इसे सुन करण की फिल्म ‘माई नेम इज खान’ के गीत ‘नूर-ए-खुदा’ की याद आती है। क्लाईमेक्स में फिल्माए गए ‘हमेशा फॉरएवर’ की मैलडी में देसीपन नहीं है। यहां ‘कल हो ना हो’ सरीखा गीत होना चाहिए था।

कहानी/पटकथा : ‘स्टेपमॉम’ देख चुके लोगों को कहानी नई नहीं लगेगी। वैसे भी ये कॉन्सेप्ट भारत में आसानी से नहीं पचाया जा सकता। 

क्या है खास : करीना-काजोल की एक्टिंग,  क्लाईमैक्स में फिल्माए गये हैवी इमोशनल सीन्स।   

क्या है बकवास : फिल्म के ट्रीटमेंट में नयापन नहीं है। ऐसा लगता है कि करण जौहर की ही किसी पुरानी फिल्म का सीक्वल देख रहे हैं।  

पंचलाइन : ‘स्टेपमॉम’ के इस देसी संस्करण से ज्यादा उम्मीद न रखें। इसमें करण जौहर कैंप का रुटीन ट्रीटमेंट दिखलाई पड़ता है, जिसमें उनके चहेते सितारे और वही पुराना फ्लेवर है। काजोल-करीना के फैन्स ही पसंद करेंगे।

सितारे : काजोल, करीना कपूर, अर्जुन रामपाल, आंचल मुंजाल, नोमिनाथ गिन्सबर्ग, दीया सोनेचा

निर्माता/बैनर :  करण जौहर-हीरू जौहर/धर्मा प्रोड. यूटीवी मोशन पिक्चर्स, सोनी पिक्चर्स
निर्देशक : सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा
संवाद : निरंजन आयंगर
कहानी : डिजी लैविग्ने
गीत :  इरशाद कामिल, अन्विता दत्ता गुप्तान
संगीत : शंकर-अहसान-लॉय

आयुष, छात्र, दरियागंज:  अच्छी मूवी है। मुझे सारे बच्चों की एक्टिंग काफी अच्छी लगी।

सपना, डिजाइनर, दिल्ली गेट: इमोशनल मूवी है। काजोल की एक्टिंग काफी अच्छी लगी।

एकता, छात्र, आसफ अली रोड: सिर्फ बच्चों की वजह से मूवी अच्छी लगी। बाकी तो कुछ खास नहीं है। 

रोमिना, गृहिणी, हौज खास: कहानी में नयापन नहीं है। जो उम्मीद की थी, वैसी नहीं निकली। बोर है।

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