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स्पॉट फिक्सिंग मामले में दागी क्रिकेटरों से पूछताछ

स्पॉट फिक्सिंग मामले में दागी क्रिकेटरों से पूछताछ

स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों से घिरे पाकिस्तान की टेस्ट टीम के कप्तान सलमान बट्ट और दोनों तेज़ गेंदबाज़ों मोहम्मद आसिफ तथा मोहम्मद आमेर से स्कॉटलैंड यार्ड के जासूसों ने शुक्रवार को यहां पूछताछ की।
 
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और दागी खिलाड़ियों की ओर से जारी एक बयान में वकील एलिज़ाबेथ रॉबर्टसन ने बताया कि बट्ट, आसिफ और आमेर से उत्तरी लंदन के किल्बर्न पुलिस थाने में पूछताछ की गई।
 
बयान में कहा गया है कि खिलाड़ियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने पुलिस के सभी सवालों के जवाब दिए और उन्हें बिना किसी शर्त या आरोप के छोड़ दिया गया है। खिलाड़ी कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन खिलाड़ियों से मामले की जांच पूरी होने तक कोई भी टिप्पणी करने से बचने को कहा गया है।
 
इन पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर आरोप है कि उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्डस में खेले गए चौथे एवं अंतिम टेस्ट में सट्टेबाज़ मज़हर माजिद के निर्देश पर जानबूझकर नो बॉल फेंकी। माजिद को इस सप्ताह की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था। स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की भ्रष्टचार एवं सुरक्षा ईकाई मामले की तहकीकात कर रही हैं।

सबसे पहले 18 वर्षीय आमेर से उनके वकील की उपस्थिति में लगभग पांच घंटे तक गहन पूछताछ की गई। पुलिस ने उनसे उस एसएमएस के बारे में पूछा जिसमें उन्होंने माजिद से पूछा था कि क्या मुझे ऐसा करना है या नहीं। आमेर के बाद आसिफ से और सबसे अंत में बट्ट से पूछताछ की गई। बट्ट के कमरे से 50 हज़ार पाउंड नकदी मिले थे। इसके बचाव में उन्होंने कहा कि यह रकम उनकी बहन की शादी में दहेज के तौर पर दी जानी थी।
 
इन खिलाड़ियों से स्विस और ब्रिटिश बैंकों में गुप्त खातों के बारों में भी पूछा गया। क्रिकेट की दुनिया को हिला देने वाले स्पॉट फिक्सिंग मामले का भंडाफोड करने वाले ब्रिटिश अखबार 'न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड' ने अपनी रिपोर्ट में माजिद के हवाले से बताया था कि उसने इन खिलाड़ियों के नाम पर गुप्त खाते खोले हैं।
 
आईसीसी ने बट्ट, आसिफ और आमेर को फिलहाल निलंबित कर दिया है और उनके क्रिकेट या खेल से जुड़ी अन्य किसी भी गतिविधि में भाग लेने पर पाबंदी लगा दी गई है। इन खिलाड़ियों के पास आईसीसी के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का विकल्प है।
 
इस बीच ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त वाजिद शमसुल हसन ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि आईसीसी ने आमेर का नाम 'प्लेयर ऑफ द ईयर' की सूची से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि मैं आईसीसी से पूछता हूं कि उनके उस सिद्धांत का क्या हुआ जिसमें कहा गया है कि जब तक कोई दोषी नहीं पाया जाता है तब तक वह बेगुनाह है।

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