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बंधकों को छुड़ाने के लिए होगी आर-पार की लड़ाई

बिहार पुलिस ने अपने एक जवान को खोने के बाद बंधक बनाए गए तीन अन्य पुलिसकर्मियों को छुड़ाने के लिए आर-पार की लड़ाई के लिए जमीनी तौर पर तैयारी कर ली है और अब नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा। नक्सलियों द्वारा एक जवान की हत्या कर दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर शुक्रवार को दिनभर राज्य के उच्चाधिकारियों के साथ बैठकों का दौर चलता रहा।

मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। राज्य के पुलिस प्रवक्ता एवं अपर पुलिस महानिदेशक पीके ठाकुर ने शुक्रवार की शाम पत्रकारों को बताया कि ग्राउंड लेवल पर अब सारा काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज किया जा रहा है। उन्होंने नक्सलियों के साथ वार्ता करने के मुद्दे के प्रश्न पर कहा कि वार्ता करना सरकार का काम है पुलिस अपने कर्तव्य का निर्वहन करेगी जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि बंधक बने पुलिसकर्मियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। उन्होंने आशा भी व्यक्त की है कि पुलिस विजयी होकर लौटेगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस अब आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हो गई है। झारखंड से भी कुछ सुरक्षाबलों को बुलाया गया है तथा इस अभियान के लिए दो हेलीकॉप्टर की तैनाती कर दी गई है।

इस मसले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर दिनभर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकों का दौर जारी रहा। इस बैठक में राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक समेत केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के अधिकारी के अलावा राज्य के कई आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बीच मुख्यमंत्री आवास एक, अणे मार्ग की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री आवास तक आने-जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है। पत्रकारों को भी मुख्यमंत्री आवास पर जाने की इजाजत नहीं है।

उधर नक्सलियों द्वारा मारे गए बिहार सैन्य बल के जवान लुकस टेटे का शव लखीसराय के चानन थाना क्षेत्र के सिमरताली जंगल से बरामद किया गया। शव को लखीसराय थाने लाया गया जहां थाना परिसर में पुलिसकर्मियों द्वारा गॉर्ड ऑफ आनर दिया गया। इस बीच टेटे के परिजनों को भी लखीसराय ले जाया गया। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक टेटे के शव को पटना लाया जा रहा है।

टेटे की हत्या छाती पर गोलीमार की गई है। शव के पास नक्सलियों का लिखा एक पर्चा भी मिला है जिसमें कहा गया है कि यह शव बंधक बनाए गए एक हवलदार का है। अगर सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो बंधक बने शेष तीन लोगों का भी यही अंजाम होगा। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

मुख्यमंत्री सचिवालय के एक अधिकारी के मुताबिक सचिवालय कक्ष में शाम चार बजे मुख्यमंत्री ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें नक्सलियों द्वारा पुलिसकर्मियों के बंधक बनाए जाने के मामले में अन्य दल के नेताओं से विचार-विमर्श किया जाएगा। उधर नक्सलियों द्वारा दिए गए तीसरे अल्टीमेटम की समय सीमा भी शुक्रवार को दस बजे समाप्त हो गई। इस बीच राज्य पुलिस मुख्यालय की मानें तो सुरक्षा बलों ने मुंगेर, जमुई और लखीसराय के जिस पहाड़ी श्रृंखला को घेरे में लिया है, उसी में नक्सलियों द्वारा बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों के होने की संभावना है।

यहां पर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे कांबिंग ऑपरेशन को तेज कर दिया गया है। राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि पटना लौट आए पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन) केएस द्विवेदी को वहां लौटकर अभियान की मॉनिटरिंग करने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस (सीआरपीएफ), विशेष कार्य बल (एसटीएफ), बिहार सैन्य बल (बीएमपी) तथा कोबरा बटालियन को लगाया गया है।

उल्लेखनीय है कि प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के मुंगेर-जमुई-लखीसराय जोन के स्वयंभू प्रवक्ता अविनाश ने गुरुवार की शाम स्थानीय चैनलों से बात करते हुए दावा किया था कि संगठन ने जन अदालत में सहायक पुलिस निरीक्षक एवं मानिकपुरा थाना के प्रभारी अभय कुमार यादव की हत्या कर दी। उल्लेखनीय है कि रविवार को लखीसराय के कजरा थाना क्षेत्र में हुए पुलिस और नक्सली मुठभेड़ में नक्सलियों ने चार पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया था।

भाकपा (माओवादी) के प्रवक्ता अविनाश का दावा है कि रविवार को लखीसराय जिले के कजरा थाना क्षेत्र में हमारे लोगों ने पुलिस दल पर हमला कर दिया और दो पुलिस निरीक्षक (एसआई) और बिहार सैन्य बल (बीएमपी) के दो जवानों को बंधक बना लिया गया है। बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों में रूपेश कुमार सिन्हा (बेतिया), अभय यादव (बेगूसराय), एहतशाम खान (मांडर, रांची) तथा लुकस टेटे (सिमडेगा, झारखंड) शामिल हैं। इनमें से लुकस टेटे की हत्या कर दी गई।

नक्सलियों ने बंधक बनाए गए चार पुलिसकर्मियों को छोड़ने के एवज में सरकार के सामने पहले बुधवार को चार बजे शाम तक तथा बाद में गुरुवार को दस बजे दिन तक और उसके बाद शुक्रवार को दस बजे दिन तक जेल में बंद अपने आठ साथियों को छोड़ने की शर्त रखी थी।

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