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कम उम्मीद के फायदे

इजराइल-फिलस्तीन की वार्ता का एक और दौर वाशिंगटन में शुरू हो गया है। इस बात के तमाम कारण हैं कि यह वार्ता भी पिछले चार दशकों में हुई तमाम वार्ताओं की तरह विफल होगी। फिलस्तीन के दो हिस्से हैं जिसमें पश्चिमी बैंक के इलाके पर फतह सरकार काबिज है और गाजा पर हमास का कब्जा है। फिलस्तीन के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास लोकतांत्रिक जनादेश की अवधि पूरी हो जाने के कारण पहले ही कमजोर हो चुके हैं। अब वे उस भूभाग के बारे में बात करेंगे, जिस पर उनका नियंत्रण नहीं है। इजराइल की राजनीति भी स्थिर नहीं है। लिकुड पार्टी के बेंजामिन नेतनयाहू की सरकार यिजराइल बेतीनू बेंजामिन नेतनयाहू के अतिवादियों के समर्थन पर टिकी हुई है। उस पार्टी के अध्यक्ष एविगडो लीबरमैन ने फिलस्तीन से किसी समझौते के प्रति अपनी असहमति छुपाने का कोई प्रयास नहीं किया है।  
द इंडिपेंडेंट, लंदन

सांप्रदायिक हत्याकांड
बुधवार को लाहौर में जिस सांप्रदायिक हमले ने 31 लोगों की जान ली है, वह इस बात की गवाही देता है, इस तरह की हिंसा हमारे कल्याण और हमारी उस एकता के लिए गंभीर खतरा है। स्थितियां उस समय तेजी से बिगड़ गईं, जब हजरत अली की शहादत के सिलसिले में जुलूस निकाल रही भीड़ दो आत्मघाती बम विस्फोट से नाराज होकर शहर के व्यावसायिक इलाकों में तोड़फोड़ करने लगी। इससे वह आम आदमी और दहशत में आ गया जो पहले से ही हमारे देश की शक्ल बदल देने वाले आतंकवाद के चलते डर में जी रहा था। इस हमले की जिम्मेदारी पंजाब के सुन्नी उग्रवादी संगठन लश्कर-ए-झांगवी और तहरीक -ए-तालिबान पाकिस्तान ने ली है। यह स्पष्ट है कि हमें लश्कर-ए-झांगवी जैसे संगठनों के खिलाफ उससे ज्यादा सख्ती करने की जरूरत है, जितनी हम पहले कर रहे थे। द न्यूज, पाकिस्तान

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