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भोजन कर लिया, अब उदर स्पर्श करें

भोजन के बाद पेट पर हाथ फेरते वक्त यह श्लोक बोला जाता है-
अगस्त्यं कुम्भर्कण च शनिं च वडवानलम्।
आहार परिपाकाम स्मरेद् भीमं च पञ्चकम्।।

केवल तीन आचमन में संपूर्ण समुद्र प्राशन करने वाले अगस्त्य मुनि, महाप्रचंड आहार लेकर उसे अच्छी तरह पचाने वाले कुंभकर्ण, महाशक्तियों को झुकाने वाला और मनुष्य का सर्वस्व हरण करने वाला शनि, निमिष में संपूर्ण जंगल भस्म करने वाला वडवानल तथा नितांत भूखा भीम -इनका स्मरण होते ही अन्न उत्तम रीति से पच जाता है।

इस श्लोक का एक अन्य चमत्कार है। अन्न भक्षण करते समय इस श्लोक को बोलने से आहार का परिमाण बढ़ता है। परंतु भोजन करने के बाद यह श्लोक बोले जाने पर अन्न का पाचन सुलभ हो जाता है।

मंद गति से सौ कदम चलें
शतपावली के संदर्भ में शास्त्र कहता है-
भुक्त्वा शतपदं गच्छेत्।
अर्थात् भोजन के बाद सौ कदम चलना चाहिए। इस विषय में आयुर्वेद में यह श्लोक दिया गया है-
भुक्त्वोपविशत: स्थौल्यं शयानस्य रूजस्थता। आयुश्चक्रमाणस्य मृत्युर्धावितधावत:।।
अर्थात् भोजन करने के पश्चात एक ही जगह बैठे रहने से स्थूलत्व आता है। जो व्यक्ति भोजन के बाद चलता है उसकी आयु में वृद्धि होती है और जो भागता या दौड़ लगाता है उसकी मृत्यु समीप आती है।

जब पेट में अन्न किसी न किसी तरह दूषित या कुपित होता है तब अनेक जानलेवा बीमारियां उत्पन्न होती हैं। इन सबसे दूर रहने के लिए पेट का अन्न पाचनशील बनाने वाली एकमेव क्रिया है- मंद गति से कदम बढ़ाते चलना। इसे ही शतपावली करना कहते हैं।

फिर बाईं करवट लेट जाएं
शतपावली के समान ही भोजन के बाद बाईं करवट लेटना भी आवश्यक है। इसे वामकुक्षि भी कहते हैं। इसका अनन्य लाभ मिलता है। इस संबंध में शास्त्र कहता है-
वामपाश्र्वेण संविशेत्।
अर्थात् भोजन करने के बाद बाईं तरफ मुंह करके कुछ देर लेटे रहें।

इसके पीछे तीन कारण हैं। पहला- अन्न का कुछ देर जठर में ही रहना शरीर के लिए पथ्यकारक होता है। जठर के आकुंचन-प्रसारण के कारण अन्न तरल होकर अगले मार्ग में प्रविष्ट होता है। दूसरा कारण है- जठर के अगले हिस्से में पूरा अन्न का दबाव पड़ता है। दाईं ओर सोने से यह दबाव नहीं आता।

तीसरा कारण है- बाईं नासिका से सूर्य नाड़ी ‘पिंगला’ और दाईं नासिका से चंद्र नाड़ी ‘इड़ा’ बहती रहती है। दाईं ओर सोने से पिंगला और बाईं ओर सोने से इड़ा प्रवाहित रहती है। अन्न पाचन के लिए पिंगला का स्वर चलना अत्यंत आवश्यक होता है। इसलिए भोजन के बाद बाईं ओर कम से कम एक घंटा 24 मिनट तक सोएं।
(‘मनोज पब्लिकेशन्स’ के सौजन्य से)

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