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नक्सली हिंसा से निपटने में बिहार सरकार विफल: कांग्रेस

बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने नक्सली हिंसा के लिए राज्य सरकार को पूरी तरह से जिम्मेवार ठहराते हुए कहा है कि इस समस्या से निपटने में उसकी उदासीनता के कारण ही नक्सली गतिविधियां बढ़ रही है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजित प्रताप सिंह ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नक्सलियों को बार-बार समाज का एक अंग बताकर उनके प्रति अपने नरम रूख को उजागर किया है।

उन्होंने कहा कि नक्सली भी समाज के ही एक अंग है इससे कोई इंकार नहीं कर सकता लेकिन यह भी सत्य है कि यह समूह हत्यारों का एक समूह है और इनके साथ भी कानून के तहत ही निपटा जाना चाहिए। सिंह ने कहा कि पिछले दो दशकों के दौरान चाहे राष्ट्रीय जनता दल हो या जनता दल यूनाइटेड दोनों ही चुनाव जीतने के लिए नक्सलियो का सहारा लेते रहे हैं और यही कारण है कि उग्रवादी संगठनों के विरूद्ध कभी भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि लखीसराय में 29 अगस्त की घटना के बाद भी राज्य सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि नक्सली हिंसा में घायल एक पुलिसकर्मी के शरीर से पांच दिन बाद भी गोली नहीं निकाली गई और वह पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जीवन मौत से जुझ रहा है।

सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने नक्सली हिंसा को देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की दो बार दिल्ली में बैठक बुलाई लेकिन दोनों बार बिहार के मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं हुए। उन्होंने राज्य सरकार से नक्सली हिंसा में मारे गए। पुलिसकर्मियों के परिजनो को 25-25 लाख रुपए मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आवास उपलब्ध कराने की मांग की।

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