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महीने भर में बस एक हिट

महीने भर में बस एक हिट

अगस्त माह में रमजान के चलते बड़ी फिल्में न के बराबर आयीं। जो आईं, उनमें कुछ खास दम नहीं था। ‘पीपली लाइव’ को छोड़ कर किसी फिल्म ने पानी तक नहीं मांगा। अगस्त में बॉक्स-ऑफिस के मिजाज पर दीपक दुआ की एक नजर।

अगस्त की शुरुआत अनिल कपूर द्वारा अपनी बेटी सोनम के लिए बनाई फिल्म ‘आयशा’ से हुई। जेन ऑस्टिन के अंग्रेजी उपन्यास ‘एम्मा’ को आज के जमाने के साउथ दिल्ली के माहौल में ढालने की इस नाकाम कोशिश को दर्शकों ने भी नकार दिया। हालांकि युवा वर्ग के शुरुआती क्रेज और मल्टीप्लेक्सों की बदौलत इस फिल्म ने पहले हफ्ते में ढाई सौ से ज्यादा प्रिंट्स पर 8.5 करोड़ रु. से ज्यादा का कलेक्शन करते हुए प्रति थिएटर 3.5 लाख रु. औसत बटोर डाले, लेकिन बहुत जल्दी इसकी कलई खुल गई और दूसरे हफ्ते में यह औसत 1 लाख 9 हजार रु. तक आ गिरा। इसी के साथ हॉलीवुड से आई ‘प्रीडेटर्स’ को भी हिन्दी वालों ने नकार दिया। इसके अंग्रेजी वर्जन को तो फिर भी देखा गया, लेकिन हिन्दी में इसने पहले सप्ताह में प्रति थिएटर महज 97 हजार रु. ही बटोरे।

दूसरे सप्ताह में रमजान शुरू हो गए। ऐसे में निर्माता आमिर खान ने चतुराई के साथ अपनी फिल्म ‘पीपली लाईव’ को रिलीज कर डाला, जिसने जबर्दस्त प्रचार और उम्दा कंटेंट के दम पर खूब तारीफें बटोरीं और अच्छी कमाई भी कर डाली। पहले सप्ताह में देश भर से 13.5 करोड़ रु. जमा करते हुए इस फिल्म ने प्रति प्रिंट 4 लाख 57 हजार रु. की कलेक्शन की, जो इसे हिट का तमगा देने के लिए काफी है। इसके साथ आई बॉबी देओल और मुग्धा गोडसे की हॉरर फिल्म ‘हेल्प’ में ऐसा कुछ नहीं था, जिसे देखने के लिए दर्शक अपनी मेहनत की कमाई इस पर खर्च करते। पहले हफ्ते में इस फिल्म ने हर सिनेमाघर से मात्र 59 हजार रु. ही बटोरे। इसी हफ्ते हॉलीवुड की ‘द एक्सपैंडेबल्स’ हिन्दी में ‘मौत के सौदागर’ नाम से आई, जो पुराने जमाने की एक्शन फिल्मों को पसंद करने वालों को ही भा सकी।

तीसरे सप्ताह में यशराज बैनर ने हिम्मत दिखाते हुए दीपिका पादुकोण और नील नितिन मुकेश वाली प्रदीप सरकार द्वारा निर्देशित ‘लफंगे परिंदे’ को रिलीज किया। यह फिल्म भी औंधे मुंह गिरी। दरअसल, इसकी कहानी या कंटेंट बुरा नहीं थी,  लेकिन इधर यशराज की फिल्मों में लगातार बनावटीपन बढ़ता जा रहा है। यह फिल्म भी ऐसी ही निकली। इसके साथ आई ‘किस हद तक’ का तो खैर नाम भी नहीं सुना गया। आखिरी हफ्ते में एक-दो नहीं, बल्कि आठ-नौ फिल्में रिलीज हुईं। लेकिन इनमें से एक भी ऐसी नहीं निकली, जो दर्शकों को थियेटरों  तक खींच पाती। असल में रमजान के आखिरी हफ्ते में करण जौहर की फिल्म ‘वी आर फैमिली’ से बड़ी फिल्मों की रिलीज की शुरुआत हो चुकी है। अगले सप्ताह ‘दबंग’ से तो कतार ही लग जाएगी। ऐसे में छोटी फिल्मों को आने का रास्ता ही नहीं मिलेगा। सो, 27 अगस्त को जॉन अब्राहम की बक्से में बंद पड़ी फिल्म ‘आशाएं’, ‘अंर्तद्वंद्व’, ‘गुमशुदा’, ‘हैलो डार्लिंग’, ‘माधोलाल कीप वॉकिंग’, ‘सोच लो’ आईं और चली गईं। इनमें से मात्र एक ‘हैलो डार्लिंग’ को ही थोड़े-बहुत दर्शक मिले।

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