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अमेरिंडियन विरासत

अपने देश में यह महीना अमेरिंडियन विरासत के लिए मनाया जाता है। दरअसल, यही लोग हैं, जिन्होंने इस धरती पर सबसे पहले कदम रखा था। वे हमारे पुरखे हैं। लेकिन वक्त ने धीरे-धीरे उन्हें हाशिये पर डाल दिया। सैकड़ों साल के उपनिवेशवाद ने उन्हें बेहाल कर दिया। 1992 में जब छेदी जगन राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने उनकी सुध ली। अपना कामकाज संभालते ही जगन ने अमेरिंडियन के लिए अलग से मंत्रलय बनाया। और हाशिये पर पड़े हुए समाज को मुख्यधारा में लाने का काम शुरू हुआ। उनके शिक्षा, स्वास्थ्य पर खास ध्यान दिया गया। हालांकि उनके लिए बहुत कुछ हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ होना बाकी है। विकास का रास्ता उनके लिए खुल गया है। शिक्षा के मामले में भी वे तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन उनकी गरीबी अब भी एक चुनौती है। अमेरिंडियन का अपना एक इतिहास है। एक खास सभ्यता और संस्कृति है। उसे वे बचाए रखें और आज के समाज में योगदान कर सकें। यही इस महीने की कामना हो सकती है।  

गुयाना क्रॉनिकल

इसे तो रोकना ही होगा
दो कॉलेजों की लड़ाई से भी सरकार नहीं निपट सकती। यह तो हद है। यहां के दो वोकेशनल कॉलेज हुआ मार्क इंडस्ट्री और टेक्नो बैंकपेई ने एक खास इलाके को बंधक बनाया हुआ है। अब उस इलाके से निकलना लोगों की मजबूरी है। और इन कॉलेजों के लोग वहां कोई भी कांड कर गुजरते हैं। सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है। कल ही एक स्कूल बस को रोक कर तोड़फोड़ हुई। उसमें एक नौ साल का बच्चा मारा गया। उसके गले में गोली लगी थी। काफी वक्त से ये सब चल रहा है। लेकिन कभी तो उसका अंत होना चाहिए। आखिर सरकार कब चेतेगी? उसे और कितने बच्चों की बलि चाहिए। 
बैंकॉक पोस्ट

 

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