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कहीं आपकी ऑनलाइन ‘पहचान’ चोरी न हो जाए

दिनोंदिन मशहूर होती जा रही सोशल नेटवर्किग साइटें बेशक व्यक्ति की पहचान का दायरा व्यापक करती हैं, लेकिन इनसे जुड़े खतरे भी कम नहीं। दुनिया भर में कई लोगों की ऑनलाइन पहचान में हैकरों ने सेंधमारी कर उसे ही उड़ा लिया है और इस समस्या से आमजन तो क्या, मशहूर हस्तियां भी दो-चार हो रही हैं। आज जानिए कि किस तरह आप अपनी ऑनलाइन पहचान को बचाए रख सकते हैं

एक सुबह आप उठें और आपको पता चले कि आपकी ‘पहचान’ चोरी हो गई है तो आप क्या करेंगे ? आप कहेंगे कि यह क्या अटपटा सवाल है। लेकिन जनाब ऐसा बिलकुल हो सकता है। आपकी पहचान के साथ कोई खिलवाड़ कर रहा हो, और आपको पता भी हो। ‘ऑनलाइन आइडेंटिटी थेफ्ट’ यानी ऑनलाइन पहचान की चोरी एक नया संकट है, जिससे आज दुनिया भर में सैकड़ों लोग जूझ रहे हैं। इसे कुछ इस तरह समझा जा सकता है कि इंटरनेट पर कई तरीकों से हर शख्स की अपनी पहचान होती है, जैसे उसका ई-मेल पता, ट्विटर, फेसबुक, लिंक्डिन और ऑकरुट वगैरह सोशल नेटवकिर्ंग साइटों पर प्रोफाइल आदि। अगर कोई व्यक्ति इनका या इनमें से किसी भी एक सेवा का ‘पासवर्ड’ हथिया ले, तो साइबर दुनिया में आपकी पहचान पर उसका कब्जा हो जाता है और वह इसका गलत फायदा उठा सकता है। आपके नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर ऑनलाइन दुनिया में सक्रिय होने पर भी आइडेंटिटी थेफ्ट का मामला बनता है।

ऑनलाइन आइडेंटिटी थेफ्ट यानी ऑनलाइन पहचान की चोरी की यह घटना हाल में नोबल पुरस्कार विजेता डॉ़ अमर्त्य सेन के साथ भी घट चुकी है। दरअसल, किसी व्यक्ति ने अमर्त्य सेन के नाम से जानी-मानी सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक पर एकाउंट बनाकर न सिर्फ लोगों से बात की, बल्कि अमर्त्य सेन बनकर लोगों के सवालों के जवाब दिए और ऐसी बातें कहीं, जो डॉ. सेन के विचारों से कतई मेल नहीं खाती। पूछे जाने पर डॉ. सेन को इसका खंडन करना पड़ा।

बड़ी हस्तियां

केवल डॉ. अमर्त्य सेन ही नहीं, बल्कि ऐसी कई मशहूर शख्सियत हैं जिन्हें ऑनलाइन आइडेंटिटी थेफ्ट का शिकार होना पड़ा है। इनमें अभिनेत्री कैटरीना कैफ, सोनम कपूर और भाजपा नेता राजीव प्रताप रूढ़ी जैसी कई हस्तियां शामिल हैं। स्टार ग्रुप के सीईओ उदय शंकर का हाल में किसी ने फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर मीडिया क्षेत्र में समूह के विस्तार की घोषणा कर दी थी। अभिनेत्री प्रीति जिंटा अब भले ट्विटर पर सक्रिय हैं, लेकिन डेढ़ साल पहले उनके नाम से फर्जी ट्विटर एकाउंट था। इसका पता प्रीति को तब चला, जब उनके फॉलोअर्स की संख्या 1,40,000 तक पहुंच गई।

मुश्किल तो यह है कि ज्यादातर ऑनलाइन सोशल नेटवर्किग सेवाएं इस बात की पड़ताल करने की कोशिश ही नहीं करती हैं कि जिस नाम से एकाउंट बनाया गया है और उस पर जो तस्वीरें इस्तेमाल की गई हैं, क्या वे वाकई में उसी इनसान की हैं। हालांकि ट्विटर पर प्रोफाइलों को ‘वेरीफाई’ किया जाता है, लेकिन करोड़ों उपयोक्ताओं में ऐसे महज मुट्ठीभर लोग ही हैं, जिनकी प्रोफाइल वेरीफाई की गई है। उनमें से भी अधिकांश वेरीफाइड प्रोफाइल जानी-मानी हस्तियों की ही है। साथ ही अधिकांश सोशल नेटवर्किग साइटें इस समस्या से पल्ला झाड़ने के लिए यह डिस्क्लेमर भी लगाकर रखती हैं कि प्रोफाइल पर दी गई सूचनाओं से साइट का कोई सरोकार नहीं है।

समस्या केवल जाने-माने लोगों की नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर आम लोगों की भी है। मुम्बई की निवासी मेलोडी लैला को अप्रैल 2008 में पता लगा कि वे भी इस ऑनलाइन जालसाजी का शिकार हो चुकी हैं, जब उनके एक दोस्त ने उन्हें बताया कि किसी ने ‘जोयी बिन्दास’ के नाम से उनकी एक प्रोफाइल बना रखी है, जिस पर उनकी तस्वीरें भी हैं। बाद में पता लगा कि ये तस्वीरें साइबर धोखेबाजों ने उनकी फ्लिकर प्रोफाइल से ली हैं। ‘फ्लिकर’ ऑनलाइन सेवा है, जहाँ लोग अपनी तस्वीरों का ऑनलाइन संग्रह कर सकते हैं।

कमजोर कानून
ऑनलाइन आइडेंटिटी थेफ्ट से निपटने के लिए साइबर कानून भी कमजोर हैं, जो हालात को और जटिल बनाते हैं। साइबर कानून के जानकार पवन दुग्गल के मुताबिक, इस तरह के मामलों में तीन साल की सजा और पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन यह जमानती अपराध है। वो कहते हैं, रोजाना मेरे पास दस से बाहर इस तरह के मामले आते हैं, जिनमें पीड़ित व्यक्ति राय मांगता है। लेकिन ऐसे मामलों में पीड़ित के लिए एफाअईआर दर्ज कराना भी काफी मुश्किल काम है।
इंटरनेट की पहुंच का दायरा इतना बढ़ चुका है कि इस तरह की ऑनलाइन जालसाजी न सिर्फ आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा तार तार कर सकती है, बल्कि इसके चलते आर्थिक तौर पर भी आपको नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आजकल इंटरनेट पर आर्थिक लेन-देन के लिए ‘पे-पैल’ और क्रेडिट-कार्ड की सूचनाएं ई-मेल के साथ अमूमन जुड़ी रहती हैं। ऐसे में अगर आपके ई-मेल पते पर किसी और का नियंत्रण हो जाए, तो वह आपके क्रेडिट-कार्ड और पे-पैल अकाउंट का बेजा इस्तेमाल कर सकता है और आपको बड़ी आर्थिक चोट पहुंचा सकता है।
जानकारों के मुताबिक साइबर दुनिया में सक्रिय कोई व्यक्ति यह भ्रम न पाले कि उसका ‘पहचान’ चोरी नहीं हो सकती, क्योंकि यह आपको नहीं पता कि अपराधी किस मकसद से इसका इस्तेमाल कर रहा है। बहुत मुमकिन है कि आपने कभी इंटरनेट का इस्तेमाल भी नहीं किया हो, और आपका फर्जी प्रोफाइल नेट पर मौजूद हो। यानी सावधानी जरूरी है।

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