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पुलिस ने लाई-डिटेक्शन बयानों पर आपत्ति जताई

हत्या के मामले में आरोपी उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक उदय भान सिंह ने पुलिस द्वारा लाई-डिटेक्शन(झूठ पकड़ने वाली जांच) टेस्ट को लेकर दर्ज किए गए गवाह के बयानों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह बयान कानूनी प्रक्रिया में स्थान नहीं रखते हैं। एडिशनल सेशन जज ओ पी सैनी की अदालत ने बहरहाल पॉलीग्राफ एक्सपर्ट ए के सिंह के बयानों को अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया है। आरोपी विधायक के वकील ने गवाह के बयानों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि इस तरह के बयानों को सबूत नहीं माना जा सकता। इब इस मामले में अगली सुनवाई 9 सितम्बर को होगी।

हालांकि सीबीआई के वकील का कहना था कि बहुतेरे मामलों में गवाह का भी लाई-डिटेक्शन टेस्ट कराया जाता है और उन बयानों को मामलों की सुनवाई में तव्वजो दी जाती है। यहां तक की मामलों के फैसले तक उन्हीं बयानों के आधार पर आए हैं। अदालत ने इस बाबत उच्च अदालतों के पूर्व फैसलों को को पेश करने का आदेश सीबीआई को दिया है। इससे पहले एक गवाह सर्वेश नारायण शुक्ला ने बयान दर्ज कराए थे। उसने कहा था कि पूर्व विधायक ने उनके परिवार को तंग किया और उसके अंकल एवं तिहरे हत्याकांड के चश्मदीद गवाह राकेश पांडे की हत्या कर दी थी। 17 फरवरी 2003 को गोपालगंज में हुई हत्या के इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली अदालत में सुनवाई के लिए स्थानान्तरित कर दिया गया था।

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