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भारत-अमेरिका मिलाएं हाथ, ताकि हद में रहे चीन

भारत-अमेरिका मिलाएं हाथ, ताकि हद में रहे चीन

अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हिंद महासागर में चीन के बढ़ते हुए प्रभाव और सैन्य क्षमता को संतुलित करने तथा उसके प्रभाव को कम करने के लिए ओबामा प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह भारत के साथ हाथ मिलाए।

हेरिटेज फाउंडेशन के देन चेंग का मानना है कि हिंद महासागर, चीन के बढ़ते आर्थिक और सुरक्षा हितों के लिए लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। चेंग ने कहा कि चीन अपनी चर्चित स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की नीति के जरिए भारत के पडोसी देशों को अपना मित्र बनाकर उसे ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहा है।

चेंग ने कहा कि चीन अपनी इस नीति से दो हित साध रहा है, एक तरफ तो वह अपने आर्थिक और सैन्य हितों की सुरक्षा कर रहा है तो दूसरी तरफ वह उभरते हुए भारत को संतुलित करना चाह रहा है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते चीनी प्रभाव को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि अमेरिका हिंद महासागर में पीछे नहीं रहे बल्कि इलाके में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ाए। भारत और अमेरिका एक दूसरे के साथ संवाद में रहने और क्षेत्र में पुन: प्रवेश की दिक्कतों से बचने के अपने संकल्प का संकेत देंगे।

चेंग ने कहा कि आने वाले समय में चीनी सामरिक योजनाकारों को हिंद महासागर में चीनी हितों पर ध्यान देना होगा।

चेंग ने कहा कि अल्पकाल में देखें तो चीन अपनी आर्थिक समृद्धि को बनाए रखने के लिए समुद्री मार्ग पर निर्भर होता जा रहा है और इसको लेकर वह चिंतित हैं। वर्ष 2010 में चीन ने अपनी तेल खपत का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा आयात किया।

चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओं पहले ही मलक्का जलड़मरू मध्य को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। चेंग ने कहा कि चीन को तेल आपूर्ति के रास्ते में एक प्रमुख कमजोर बिंदू मलक्का जलड़मरूमध्य है। चीन के हितों को बनाए रखने के लिए पाकिस्तान और बर्मा में वैकल्पिक बंदरगाहों और पाइपलाइनों के निर्माण से मलक्का जलड़मरूमध्य की जटिलता कम होगी।

उन्होंने कहा कि यदि चीनी की तेल आपूर्ति मलक्का जलड़मरूमध्य से नहीं गुजरता है तो भी यह हिंद महासागर के काफी बड़े हिस्से से गुजरेगा। भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत का अर्थ है कि चीनी आर्थिक विकास काफी कुछ भारत और अमेरिका की दया पर निर्भर करेगी। भारत का जापान और अमेरिका के साथ सुरक्षा संपर्क बढ़ना चिंता का एक पहलू हो सकता है।

इसी वजह से चीन अपनी स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति के तहत भारत के पड़ोसी राष्ट्रों को मिलाने की कोशिश कर रहा है ताकि हिंद महासागर में उसके हितों की रक्षा हो सके।

चेंग ने कहा कि इसी कारण से चीन विभिन्न दक्षिण एशियाई देशों के साथ रिश्ते बनाने की चाहत रखता है जो सैन्य रिश्ते तक सीमित नहीं है। वह भारत को अलग थलग करने की नीति के बजाय उसके पड़ोसियों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है।

चेंग ने कहा कि चीन की यह नीति उसके व्यापक उद्देश्यों का हिस्सा है। चीन का उद्देश्य है कि उसकी तेल आपूर्ति सुरक्षित रहे और मित्र देशों से घिरी रहे। उन्होंने कहा कि भारत को संतुलित करना चीन की बढ़ती हुई चिंता है। उसकी चिंता न केवल तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखना है बल्कि भारत का समग्र विकास भी है।

चेंग ने कहा कि जिस तरह से अमेरिका उभरते हुए चीन को लेकर चिंतित है और वह चीन की बढ़ती अर्थव्यवस्था से कैसे निपटे इसको लेकर भी परेशान है उसी तरह से चीनी नेता भी उभरते हुए भारत के सवाल से रूबरू हैं।

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