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3जी स्पेक्ट्रम विजेताओं ने मानी सरकार की बात

3जी स्पेक्ट्रम विजेताओं ने मानी सरकार की बात

थ्री-जी शुल्क मामले में विजेता बोलीदाता कंपनियों को सरकार की बात माननी पड़ी है और और वे संशोधित लाइसेंस नियमों के तहत 3जी स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल पर ऊंची दर से शुल्क चुकाने को तैयार हो गयी हैं।

दूरसंचार विभाग ने इस साल अप्रैल में मोबाइल फोन कंपनियों पर स्पेक्ट्रम उपयोक्ता शुल्क को बढा़कर उनके समायोजित सकल आय के 2-6 प्रतिशत की जगह 3-8 प्रतिशत करने का निर्णय किया। वास्तविक शुल्क स्पेक्ट्रम की मात्रा पर निर्भर करता है।

इस निर्णय पर भारती, वोडाफोन तथा आइडिया ने टीडीसैट में चुनौती दी थी। अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। 3जी लाइसेंस को लेकर इस वृद्धि के मामले में डीओटी के अधिकारियों का तर्क था कि इसके लाइसेंस के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों को फैसले की जानकारी पहले दे दी गयी थी।

3जी स्पेक्ट्रम हासिल करने वाली दूरसंचार कंपनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन तथा आइडिया को इस रेडियो तरंग के इस्तेमाल के लिए अधिक धन देना होगा। हालांकि 2जी के मामले में इसी तरह के फैसले पर दूरसंचार न्यायाधिकरण टीडीसैट ने रोक लगा दी है।

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