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दक्षिण अफ्रीका ने रंगभेद के कारण गंवाई थी मेज़बानी

दक्षिण अफ्रीका ने रंगभेद के कारण गंवाई थी मेज़बानी

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने रंगभेद नीति के कारण दक्षिण अफ्रीका को 1970 में दो दशक से भी अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से प्रतिबंधित रखा लेकिन इससे पहले भी इस देश को अपनी इस विवादास्पद नीति के कारण खेलों में बेरूखी का सामना करना पड़ा था जब 1934 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी उससे छीन ली गई थी।
     
दूसरे राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग को सौंपी गई थी लेकिन देश की रंगभेद नीति के कारण राजनीतिक संकट से बचने और राष्ट्रमंडल देशों के मेहमान खिलाड़ियों और एथलीटों को इसके असर से बचाने के लिए इन खेलों का आयोजन इंग्लैंड की राजधानी लंदन में कराया गया।
     
इतना ही 1934 में ही महिला एथलीटों को पहली बार इन खेलों में भाग लेने का मौका मिला। इस दौरान यह भी ध्यान रखा गया कि उन स्पर्धाओं को शामिल नहीं किया जाए जो काफी थकाउ है। इससे पहले 1930 में हैमिल्टन में हुए खेलों में महिलाओं ने केवल तैराकी और गोताखोरी की स्पर्धाओं में हिस्सा लिया था।

राष्ट्रमंडल खेलों को हालांकि तब ब्रिटिश एंपायर खेल के नाम से जाना जाता था। यह नाम इन खेलों से 1950 तक जुड़ा रहा। इसके बाद इन्हें ब्रिटिश एंपायर एवं राष्ट्रमंडल खेल, फिर ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेल और 1978 से राष्ट्रमंडल खेल नाम दिया गया।
      
हैमिल्टन में 1930 में शिरकत करने वाले 11 देशों के अलावा पहली बार इन खेलों में भारत, हांगकांग, जमैका, ज़िम्बाब्वे (रोडेशिया) और त्रिनिदाद ने भी हिस्सा लिया जब इन खेलों में न्यूफाउंडलैंड ने अंतिम बार कनाडा से अलग भाग लिया।

लंदन में चार से 11 अगस्त तक हुए इन खेलों में 16 देशों के लगभग 500 खिलाड़ियों ने छह खेलों की 68 स्पर्धाओं में शिरकत की। इन खेलों में एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, साइकिलिंग, लॉन बाल्स, तैराकी, गोताखोरी और कुश्ती को शामिल किया गया।
     
इंग्लैंड ने 1934 में राष्ट्रमंडल खेलों में पूरी तरह से दबदबा बनाएये रखा और शुरूआत से लेकर अंत तक अन्य देशों पर हावी रहा। मेज़बान देश 29 स्वर्ण, 20 रजत और 24 कांस्य के साथ कुल 73 पदक के साथ चोटी पर रहा। कनाडा से हालांकि उसे कड़ी टक्कर मिली जिसने 17 स्वर्ण, 25 रजत और नौ कांस्य की मदद से कुल 51 पदकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।
     
फिलहाल राष्ट्रमंडल खेलों का सबसे मज़बूत देश और अब तक सर्वाधिक 10 बार चोटी पर रहा ऑस्ट्रेलिया 1934 में केवल आठ स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य सहित कुल 14 पदक के साथ तीसरा स्थान ही हासिल कर पाया था। प्रतियोगिता में पहली बार शिरकत कर रहा भारत केवल एक कांस्य पदक हासिल कर पाया था। भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों का यह पहला पदक राशिद अनवर ने कुश्ती की वेल्टरवेट (74 किग्रा) स्पर्धा में जीता था।
     
रिकॉर्डों के लिहाज़ से भी यह प्रतियोगिता अहम रही और इसमें 12 नये रिकॉर्ड बने जिसमें से 11 रिकॉर्ड तैराकों के नाम गए जबकि एक रिकॉर्ड साइकिलिंग में बना। कनाडा ने तैराकी में चार टीम रिकॉर्ड बनाने के अलावा दो व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी बनाए।

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