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पहले खेलों में एक कमरे में ठहरे थे दो-दर्जन खिलाड़ी

पहले खेलों में एक कमरे में ठहरे थे दो-दर्जन खिलाड़ी

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान खिलाड़ी यमुना किनारे बनाए गए आलीशान खेल गांव में ठहरेंगे लेकिन आज से 80 साल पहले जब इन खेलों की शुरुआत हुई तो खिलाड़ियों को एक स्कूल में ठहराया गया था। अब एक कमरे में महंगे गद्देदार बिस्तरों पर दो खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था है जबकि उस समय एक कमरे में लगभग दो दर्जन खिलाड़ी अपनी रात गुजारते थे।

राष्ट्रमंडल खेलों को हालांकि तब ब्रिटिश एम्पायर खेल के नाम से जाना जाता था। यह नाम इन खेलों से 1950 तक जुड़ा रहा। इसके बाद इन्हें ब्रिटिश एम्पायर व राष्ट्रमंडल खेल, फिर ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेल और 1978 से राष्ट्रमंडल खेल नाम दिया गया। जैसे जैसे खेल रंग में आए इनमें सुविधाएं बढ़ती चली गई हैं। राष्ट्रमंडल खेलों का शुरुआती विचार इंग्लैंड के एस्टले कूपर ने 1891 में ‘ग्रेटर ब्रिटेन’ पत्रिका में अपने आलेख में दिया था लेकिन इसे मूर्तरूप लेने में 39 साल लग गए। पहली बार इन खेलों का आयोजन 16 से 23 अगस्त के बीच कनाडा के शहर हैमिल्टन में किया गया जिसमें छह खेलों में 11 देशों के 400 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। आज खिलाड़ियों का आंकड़ा भी बढ़ गया है और इस बार के खेलों में 71 देशों के 8000 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

हैमिल्टन में हालांकि तब खिलाड़ियों के ठहरने के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं थी। आयोजकों ने मुख्य स्टेडियम सिविक स्टेडियम के करीब स्थित प्रिंस ऑफ वेल्स स्कूल में खिलाड़ियों को ठहराया था।

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