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जन्माष्टमी : यमुना में उफान के साथ ब्रज में उत्साह

श्रीकृष्ण की जन्मभूमि में यमुना की बाढ़ पहुंचने के साथ वृंदावन, मथुरा और आगरा में जन्माष्टमी पर्व मनाने के लिए उत्साहित श्रद्धालु घाटों पर जमा हो गए हैं। सदियों पहले जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था तब भी शायद यमुना नदी ऐसे ही उफान पर थी।

गुरुवार को जन्माष्टमी के रूप में श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाएगा। वृंदावन के संगीतकार आचार्य जैमिनि कहते हैं, ''भगवान कृष्ण के जन्मदिन के आस-पास ऐसे ताजगीपूर्ण और सुंदर दृश्य दिखते हैं जो आपके मन को समारोह की भावनाओं से भर देते हैं।''

उन्होंने कहा, ''नदियों के किनारे हरियाली छाई होती है, चहचहाती चिडियों के छोटे-छोटे कीड़ों को चुगने और नीले आकाश में उड़ान भरते इन पक्षियों के साथ हवा में गीत गुंजायमान रहते हैं। वृंदावन और मथुरा के विश्राम घाटों पर सजी-धजी, रंग-बिरंगी नौकाएं खड़ी रहती हैं तो गोकुल और महावन घाट पर भक्तों की भीड़ छाई रहती है।''

आगरा के मथुराधीश मंदिर के पुजारी हरि मोहन श्रोत्रिय कहते हैं कि जो लोग यह भूल गए थे कि आगरा में भी एक नदी है अब वे फिर से यहां लौटने लगे हैं और यमुना किनारे लहरों को गिनते हुए घंटों गुजार देते हैं। वह कहते हैं, ''यमुना ने इस जन्माष्टमी को खास बना दिया है। मंगलवार को नदी का जल खतरे के निशान, 495 फुट को पार कर गया। इस समय यमुना में 495.3 फुट पानी है।''

मंगलवार को कृष्ण जन्मस्थली के ज्यादातर इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। मथुरा और आगरा जिले में निचले स्थानों पर बसे गांवों में पानी भर गया है। इस साल ब्रज में पर्याप्त बारिश हुई है, इस वजह से यहां हरियाली छाई हुई है और पवित्र कुंड जल से भर गए हैं।

मथुरा में जिला अधिकारियों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। जन्माष्टमी के मुख्य समारोह यहीं होते हैं। इस अवसर पर एक लाख भक्त पहले ही मथुरा पहुंच गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए विशेष रेलगाडियां चलाई जा रही हैं।

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