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आर्कियोलॉजी उनका करियर, जो चुनौती स्वीकारना जानते हैं

मेरी उम्र 25 वर्ष है। मैंने हिस्ट्री में ग्रेजुएशन की है। क्या आप मुझे आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के बारे में जानकारी दे सकती हैं? कृपया रोजगार की संभावनाओं और अच्छे संस्थानों की जानकारी उपलब्ध कराएं।
राजेश कुमार

आर्कियोलॉजी उन व्यक्तियों के लिए एक चुनौती है, जिनकी इतिहास में रुचि है और यह जानना चाहते हैं कि दुनियाभर के लोग-देश कैसे सोचते, रहते और जीवन व्यतीत करते हैं। आर्कियोलॉजिस्ट को धैर्य, लगन, कल्पना, तार्किक दिमाग, तत्थात्मक निष्कर्षो की रिपोर्ट तैयार करने और अच्छी भाषा और लेखन दक्षता से युक्त होना चाहिए। आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में कार्य करने के तीन क्षेत्र हैं : फील्ड वर्क, लैब वर्क और पब्लिकेशन। छात्र आर्कियोलॉजी में कई तरह की संभावनाएं तलाश सकते हैं। म्यूजियम, आर्काइव्स, यूनिवर्सिटीज तथा सुनहरे इतिहास की खोज में लगे शोध संस्थानों में रोजगार पाया जा सकता है। साथ ही आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में आर्कियोलॉजिस्ट के पद के लिए हर वर्ष आयोजित होने वाली यूपीएससी की परीक्षा में बैठ सकते हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, इंस्टीटय़ूट ऑफ आर्कियोलॉजी, 24 तिलक मार्ग, नई दिल्ली -110001 द्वारा कराए जाने वाले आर्कियोलॉजी में 2 वर्ष के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (पीजीडीए) में जा सकते हैं। जिन्होंने एंशिएंट/ मेडिवल इंडियन हिस्ट्री में एमए या आर्कियोलॉजी में एमए/ एमएमसी 55 फीसदी अंकों के साथ की है, वे इस कोर्स के लिए योग्य हैं। दिल्ली इंस्टीटय़ूट ऑफ हैरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट, कुतुब इंस्टीटय़ूशनल एरिया, नई दिल्ली आर्कियोलॉजी में दो स्पेशल प्रोग्राम भी कराए जाते हैं :

क) मास्टर इन कंजरवेशन, प्रीजरवेशन एंड हैरिटेज मैनेजमेंट।
ख) मास्टर इन आर्कियोलॉजी एंड हैरिटेज मैंनेजमेंट।

यह प्रोग्राम 2 वर्ष की अवधि का है और कोर्स जुलाई में शुरू होता है। हिस्ट्री, आर्कियोलॉजी, कैमिस्ट्री, फिजिक्स, जूलॉजी, बॉटनी, जियोलॉजी, म्यूजियोलॉजी, एंथ्रोपोलॉजी में ग्रेजुएट/ बीई, बीआर्क, बीटाउन प्लानिंग में ग्रेजुएट आवेदन कर सकते हैं।

मैं सोशल वर्कर बनना चाहता हूं, लेकिन इसके स्कोप को लेकर काफी सशंकित हूं। क्या आप इस विषय में मार्गदर्शन कर सकती हैं?
विशाल, प. बंगाल

सोशल वर्क का क्षेत्र काफी व्यापक है। सोशल वर्कर न केवल पारम्परिक सोशल सर्विस एजेंसी में कार्य करते हैं, बल्कि कई अन्य क्षेत्र भी इनके लिए खुले हैं। सोशियोलॉजिस्ट्स तथा सोशल वर्कर्स के लिए करियर की संभावनाएं पोस्टग्रेजुएशन में आपकी विशेषज्ञता के क्षेत्र से भी जुड़ी हैं। बहरहाल व्यापक रूप से ज्यादातर सोशियोलाजिस्ट/ सोशल वर्कर सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों के लिए काम करते हैं। सोशल वर्क के लिए दृढ़ निश्चय तथा मदद करने की इच्छा शैक्षिक योग्यता से ज्यादा अपेक्षित होती है। हालांकि औपचारिक प्रशिक्षण हमेशा अनिवार्य नहीं होता। इस क्षेत्र में प्रभावी होने के लिए सोशल वर्क में डिग्री कारगर होगी। किसी विषय में ग्रेजुएशन के बाद ज्यादातर यूनिवर्सिटीज तथा दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, दिल्ली यूनिवर्सिटी तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया द्वारा कराये जाने वाले बीएसडब्ल्यू या एमएसडब्ल्यू के लिए आवेदन कर सकते हैं। ज्यादातर पाठय़क्रमों में एडमिशन लिखित परीक्षा तथा इंटरव्यू के आधार पर होता है, जिसमें दिए गए विषय पर आपकी जानकारी और अभिरुचि इत्यादि अपनी बात को कहने की क्षमता तथा कोर्स में शामिल होने के लिए अपकी अन्त: प्रेरणा का परीक्षण किया जाता है। सोशल वर्क के विशेष क्षेत्रों के लिए अन्य ट्रेनिंग कोर्स भी होते हैं, जो पुनर्वास परिषद, स्पेस्टिक सोसायटी, एसोसिएशन फॉर द ब्लांइड तथा अन्यों द्वारा कराए जाते हैं। सोशल वर्कर इन क्षेत्रों में काम कर सकते हैं- मेडिकल सोशल वर्क, स्कूल सोशल वर्क, क्लिनिकल सोशल वर्क, एडमिनिस्ट्रेशन तथा मैनेजमेंट सोशल वर्क, केस मैनेजर, इंटरनेशल सोशल वर्क, सोशल वर्क- बच्चे तथा परिवार, नर्सिंग होम्स सोशल वर्क, गहन मनोचिकित्सक अस्पताल में सोशल वर्क, सोशल वर्क- कम्युनिटी ऑर्गेनाइजर। आप रुचि के हिसाब से क्षेत्र चुन सकते हैं।

अगर अपनी शिक्षा और करियर को लेकर आपके जेहन में भी कोई सवाल है तो लिख भेजें-सलाह, नई दिशाएं, हिन्दुस्तान, 18-20 कस्तूरबा गांधी मार्ग, नयी दिल्ली-110001 या मेल करें- naidishayen@hindustantimes.com

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