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यमुनोत्री धाम पर धूमधाम से मनाई जाती है जन्माष्टमी

भगवान कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाने वाला हिन्दुओं का पावन त्योहार जन्माष्टमी वैसे तो पूरे देशभर में धूमधाम से मनाई जाता है परंतु भगवान के साथ अपार संबंधों के कारण सूर्यपुत्री यमुना की प्रादुर्भाव स्थली यमुनोत्री धाम पर भी इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर यहां विशेष पूजा अर्चना भी की जाती है।

यमुनोत्री के विधायक केदार सिंह रावत ने बताया कि भगवान द्वारा वरण करने का वचन दिए जाने के कारण पवित्र यमुना के उद्गम स्थल यमुनोत्री धाम पर कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव धूमधाम व विशेष तौर तरीकों से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर मंदिर की विशेष सजावट के अलावा दिनभर भजन कीर्तन होगा और शाम को विशेष पूजा होगी।

रावत ने कहा कि हिन्दू धर्म ग्रथों के अनुसार यमुना के भगवान कृष्ण के साथ जुड़ाव के कई प्रसंग हैं। इसी कारण पवित्र नदी के उद्गम स्थल पर विशेष पूजा होती है। उन्होंने कहा कि दो सितंबर को यह पूजा होगी। इस वर्ष भी बड़ी मात्रा में श्रदालुओं के यहां पहुंचने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि विशेष आयोजन गुरुवार को होगा। बरसात की वजह से बाधित यात्रा मार्ग भी अब सुचारू हो गया है। साथ ही सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम हैं। उन्होंने बताया कि मार्ग में पड़ने वाले माननी चट्टी स्थित राधा कृष्ण मंदिर में भी पूजा का विशेष प्रबंध है।

गौरतलब है कि हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार पवित्र यमुना का भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में अवतरित हुए कृष्ण के साथ अनूठा संबंध है। इसी कारण यमुना में स्नान का पुण्य गंगा स्नान से भी 100 गुणा ज्यादा लाभदायक माना जाता है। क्योंकि पवित्र गंगा को सिर्फ एक ही बार भगवान विष्णु का पग छूने का अवसर मिला था जबकि यमुना में तो कृष्ण अपने सखाओं के संग खेले और नहाए थे।

यही नहीं यमुना का बहाव क्षेत्र वृदांवन और मथुरा से गुजरने के कारण उन्हें भगवान के नवजात शिशु के रूप में भी पैर छूने का अवसर प्राप्त हुआ था। सनद रहे कि जब वासुदेव नवजात कृष्ण को मथुरा से यमुना नदी पार कर गोकुल ले जा रहे थे तब यमुना ने भगवान के पवित्र पग को छूकर वासुदेव को नदी पार करने में सहायता की थी।

राज्य के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने प्रदेश के लोगों को कृष्णा जन्माष्टमी के अवसर पर हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। एक संदेश जारी कर निशंक ने कहा कि जन्माष्टमी के पावन अवसर पर हम सभी को समाज से बुराइयों को समाप्त करने के लिए प्रेरणादायक कदम उठाने चाहिए।

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