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अमेरिकी मिशन के जमीन बेचने में विदेश मंत्रालय की अड़चन

अमेरिकी मिशन के जमीन बेचने में विदेश मंत्रालय की अड़चन

अमेरिकी दूतावास की एक कीमती जमीन बेचने की योजना में उस समय अड़चन आ गई जब भारत सरकार ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। सरकार को लगता है कि यह सौदा संपत्ति के व्यावसायिक मूल्य के अनुरूप नहीं है।

दूतावास ने तिलक मार्ग स्थित लुटियन बंगला क्षेत्र में स्थित दो एकड़ जमीन को एक निजी बिल्डर को छह वर्ष पहले 46 करोड़ रुपए में बेचने का सौदा किया था। सूत्रों ने बताया कि इस विषय में विदेश मंत्रालय से जरूरी स्वीकृति मांगी गई थी, लेकिन इतने वर्षों में मंत्रालय से स्वीकृति नहीं प्राप्त हुई है।

विदेशी मंत्रालय की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है लेकिन स्पष्ट तौर पर इसे अमेरिकी सरकार के साथ उस विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें वहां की सरकार ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के पास भारतीय राजनयिकों के आवासीय परिसरों पर प्रति वर्ष 70 लाख डॉलर के हिसाब से संपत्ति कर लगाया गया है।

सूत्रों ने बताया कि इस विषय पर विवाद के जारी रहने के बीच तिलक मार्ग पर स्थित इस जमीन की कीमत कई गुणा बढ़ गई, जिस पर विदेश मंत्रालय ने यह कहा कि वर्तमान बाजार भाव के हिसाब से जमीन की 46 करोड़ रुपए कीमत उपयुक्त नहीं है।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी दूतावास इस विषय को विदेश मंत्रालय के समक्ष सक्रियता से उठा रही है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। बहरहाल, न्यूयॉर्क में भारतीय आवासीय परिसरों से जुड़ा विवाद सुलझ गया है और अमेरिकी सरकार ने कर लगाने के खिलाफ निर्णय किया है।

इस मामले में न्यूयॉर्क की एक अदालत के समक्ष सुनवाई में अमेरिकी सरकार ने पिछले वर्ष कहा था कि अगर विदेशी संपत्ति पर कर लगाया जाता है तो अमेरिका को भी दूसरे देशों में स्थित अपने राजनयिक इमारतों के लिए लाखों डालर कर के रूप में देने पड़ेंगे। यह मामला 10 दिन पहले सुलझ गया और तीन जजों की पीठ ने भारतीय आवासीय परिसरों को 70 लाख डॉलर प्रति वर्ष कर से छूट प्रदान कर दी।

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  • Web Title:अमेरिकी मिशन के जमीन बेचने में विदेश मंत्रालय की अड़चन