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13 हजार रनों के शिखर पर पहुंचे जयसूर्या

श्रीलंका के विस्फोटक आेपनर सनत जयसूर्या एकदिवसीय क्रिकेट इतिहास में भारत के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बाद 13 हजार रनों के शिखर पर पहंचने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। 3वर्षीय जयसूर्या 428वें मैच में 13 हजार वनडे रन पूरे करने की उपलब्धि पर पहुंचे हैं। उन्होंने दाम्बुला में भारत के खिलाफ पहले एकदिवसीय मैच में 107 रन की अपनी शतकीय पारी का 37वां रन बनाने के साथ ही 13 हजार रन का आंकड़ा छू लिया। वह अब 428 मैचों में 32.83 के औसत से 13070 रन बना चुके हैं जिनमें 28 शतक और 67 अर्धशतक शामिल हैं। जयसूर्या पिछले कुछ समय से अपनी लय में नहीं दिखाई दे रहे थे और अच्छी शुरुआत के बावजूद बड़ी पारी खेलने से चूक रहे थे। लेकिन इस मैच में उन्होंने जो लय पकड़ी तो फिर बाएं हाथ के इस विस्फोटक बल्लेबाज ने अपना 28वां एकदिवसीय शतक ठोक कर ही दम लिया। एकदिवसीय विकेट में 13 हजार रन बनाने वाले दो बल्लेबाजों सचिन और जयसूर्या की तुलना की जाए तो श्रीलंकाई आेपनर भारतीय रन मशीन के मुकाबले इस उपलब्धि तक पहुंचने में हालांकि कुछ धीमे रहे। सचिन ने जहां 330 मैचों की 321 पारियों में 13 हजार रन पूरे किए वहीं जयसूर्या ने 428 मैचों की 416 पारियों में यह आंकड़ा पार किया। दिलचस्प बात है कि सचिन और जयसूर्या दोनों ने अपना एकदिवसीय कैरियर आठ दिन के अंतराल में दिसंबर 1में शुरू किया था। लेकिन सचिन ने जहां 13 हजार रन तक पहुंचने में 14वर्ष और 8दिन का समय लगाया वहीं जयसूर्या को इस आंकड़े तक पहुंचने में 1वर्ष से अधिक का समय लग गया। जयसूर्या के लिए इस उपलब्धि तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता यदि उनके अंदर खेल में वापसी करने की दृढ इच्छाशक्ित नहीं होती। पिछले पांच वषर्ो में जयसूर्या के कैरियर में कई उतार चढ़ाव आए। उन्हें टीम से भी बाहर होना पड़ा और एक समय यह भी कहा गया कि उनका करियर खत्म हो गया है। लेकिन उन्होंने हर बार अपने आलोचकों को गलत साबित करते हुए मैदान में जबरदस्त वापसी की। वह 3वर्ष की संन्यास की उम्र होने के बावजूद वैसे ही विस्फोटक अंदाज में खेल रहे हैं जैसे वह 1े विश्व कप में श्रीलंका की खिताबी सफलता के दौरान खेले थे। आज अपने 28वें वनडे शतक (107) के लिए उन्होंने सिर्फ 114 गेंदों का सामना किया और दस चौके तथा एक छक्का लगाया। जयसूर्या ने 1े विश्व कप में विस्फोटक बल्लेबाजी को नया आयाम दिया था। उसके बाद से उनकी ऐसे बल्लेबाज के रूप में पहचान बन गई जो विपक्षी गेंदबाजों की गेंदों को गाजर मूली की तरह काट डालता है।

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