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क्या वाकई रिझाती है महंगी फिल्मों की फंतासी

क्या वाकई रिझाती है महंगी फिल्मों की फंतासी

भारतीय सिनेमा के इतिहास में शायद पहली बार तमाम हिन्दी भाषी अखबारों एवं पत्रिकाओं में कोई दक्षिण भारतीय फिल्म सुर्खियों में है। यह महत्वपूर्ण इसलिए है कि दक्षिण की फिल्म को यह सुर्खियां हिन्दी फिल्म की कीमत पर मिल रही हैं। जी हां, सलमान खान की फिल्म ‘दबंग’ के सामने जिस फिल्म की जोरदार चर्चा हैं, वह है तमिल और तेलुगु भाषा में बनायी गयी और हिन्दी में डब कर रिलीज की जा रही रजनीकांत और ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर विज्ञान फंतासी फिल्म ‘एंधिरन’। हिन्दी इसे ‘रोबोट’ के नाम से ही रिलीज किया जाएगा।

‘एंधिरन’ भारत की ही नहीं, एशिया की सबसे महंगी फिल्म है। इस फिल्म का बजट 150-160 करोड़ रु. बताया जा रहा है। बजट का 40 फीसदी हिस्सा स्पेशल इफेक्ट्स और ग्राफिक्स पर खर्च किया गया है। पिछले दो सालों से बन रही इस फिल्म की शूटिंग विएना, पेरू, अमेरिका और ब्राजील की खूबसूरत लोकेशंस में हुई है। फिल्म में रजनीकांत ने एक वैज्ञानिक और उसके रोबोट की दोहरी भूमिका की है। फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स तैयार किए हैं ‘टर्मिनेटर’ और ‘जुरासिक पार्क’ सीरीज की टीम ने। रजनीकांत और ऐश के भव्य कास्ट्यूम्स फिल्म ‘बैटमैन’ के डिजाइनर द्वारा बनायी गयी है और स्टंट डिजाइन किए हैं ‘द मैट्रिक्स’ की टीम ने।

ये रोचक तथ्य है कि भारत की ज्यादातर महंगी फिल्में दक्षिण में बनी हैं। रजनीकांत की फिल्म ‘शिवाजी’ जहां 90 करोड़ में बनी थी, वहीं कमल हासन की फिल्म ‘दशावतारम’ पर 140 करोड़ खर्च हुए। ‘शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार बिजनेस कर 430 करोड़ बटोरे। इधर, बॉलीवुड में अभी तक किसी फिल्म पर 100 करोड़ भी खर्च नहीं हुए हैं। हिन्दी की सबसे महंगी फिल्म अक्षय कुमार की ‘ब्लू’ मानी जाती है, जिस पर 75 करोड़ खर्च हुए थे। ‘ब्लू’ के बजट का ज्यादातर हिस्सा अक्षय की डबल डैकर फीस के रूप में उनकी जेब में गया और बाकी पैसे विदेशी  लोकेशंस, अंडरवाटर तकनीक, महंगे सेट्स और कास्ट्यूम में खर्च हुए, लेकिन कमजोर कंटेंट की वजह से यह फिल्म फ्लॉप साबित हुई।

आशुतोष गोवारिकर की रितिक और ऐश्वर्या संग बनी फिल्म ‘जोधा अकबर’ का बजट भव्य सेट्स, युद्घ दृश्यों तथा लीड सितारों की भारी-भरकम फीस की वजह से 40 करोड़ तक पहुंच गया था। शाहरुख खान की फिल्म ‘माई नेम इज खान’ पर 40 करोड़ खर्च हुए और इसे फॉक्स स्टूडियो ने 100 करोड़ में खरीद था। रणबीर कपूर और सोनम कपूर की डेब्यू फिल्म ‘सांवरिया’ पर भी 40 करोड़ खर्च हो गये थे। ‘सांवरिया’ के साथ रिलीज हुई शाहरुख खान की ही एक अन्य फिल्म ‘ओम शांति ओम’ का बजट 45 करोड़ का था। फिल्म का बड़ा आकर्षण भव्य सेट और 31 नए-पुराने फिल्मी सितारों का एक साथ गीत गाना था। बड़ा बजट और बड़े सितारे के साथ फिल्में बनाना करण जौहर का शगल है। ‘कभी खुशी कभी गम’ का बजट 42 करोड़ का था। ‘कभी अलविदा ना कहना’ पर 44 करोड़ खर्च हो गये थे। उधर, इंडस्ट्री में अपने में सीमित टाइप रहने वाले राकेश रौशन ने ‘कोई मिल गया’ के सीक्वल ‘कृष’ में 50 करोड़ खर्च कर डाले और भरपूर कमाई भी की। करीब दस साल पहले आयी फिल्म ‘देवदास’ भी 53 करोड़ के बजट के कारण काफी चर्चा में थी। भंसाली का यह सौदा मुनाफे में रहा, लेकिन अनलकी रहे अनिल शर्मा और सनी देओल, जिन्होंने ‘गदर’ की कामयाबी को भुनाने के लिए ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ ए स्पाइ’ के निर्माण में 55 करोड़ फूंक डाले थे। बड़े बजट में पैसे फूंकने का खेल अक्की से बेहतर कौन जाने। उनकी फिल्म ‘कमबख्त इश्क’ पर 60 करोड़ का खर्चा आया, जिसके ऐवज में जेब में आया कलेक्शन निर्माता के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए नाकाफी था। अक्की के बाद रितिक और बारबरा फिल्म ‘काइट्स’ 60 करोड़ खर्च हुए। पर नतीजा सब जानते हैं। खर्च तो आमिर  की ‘मंगल पांडेय’ पर भी 60 करोड़ हुए थे, जिसे उनके स्टेटस के हिसाब वाली कामयाबी नहीं मिली। आमिर हारे नहीं। ‘गजिनी’ का बजट 65 करोड़ था और मुनाफा ऐसा कि संभाला न गया। बड़े बजट के साथ अभिषेक बच्चन एक ऐसे स्टार हैं, जो हमेशा घाटे में रहे। उनकी फिल्म ‘द्रोणा’ 79 करोड़ खर्च हुए, लेकिन नतीजा निकला फ्लॉप। 

कहा जाता है कि भारत की पहली महंगी फिल्म के. आसिफ की ‘मुगल-ए-आजम’ (1960) थी, जिसके निर्माण नौ सालों तक चला और खर्चा आया 10.5 करोड़। उस दौर में खर्च हुई इतनी बड़ी रकम चौंकाती है। 80 के दशक में आयी कमाल अमरोही की ‘रजिया सुल्तान’ में 23 करोड़ खर्च हो गये थे। उस दौर की बड़े बजट की फिल्मों में ‘पाकीजा’ का नाम भी शामिल किया जाता है। आने वाले समय में भी कुछ महंगी फिल्में प्रदर्शित होने जा रही हैं, जिनका बजट 100 करोड़ के आस-पास है। शाहरुख खान के बैनर चले बन रही ‘रा-1’ के स्पेशल इफ्केट्स  ‘दि मैट्रिक्स’ और ‘माईनॉरिटी रिपोर्ट’ के विजुअल इफैक्ट्स गुरू चाल्र्स डर्बी पूरा कर कर रहे हैं। अनुमान है कि इस फिल्म का बजट सौ करोड़ से ऊपर जा सकता है। रजनीकांत की बेटी सौंदर्या द्वारा बनाई जा रही फिल्म ‘सुल्तान : द वॉरियर’ पर 80 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। खबर है कि आशुतोष गोवारीकर की फिल्म ‘बुद्घा’ का इनीशियल बजट ही 400 करोड़ का रखा गया है।

सवाल यह है कि क्या बड़े बजट की फिल्में दर्शकों के आकर्षण का केन्द्र होती हैं? क्या सभी महंगी फिल्मों में हिट होने की काबलियत होती है? वास्तविकता यह है कि अक्सर महंगी फिल्म में तमाम बातों पर ध्यान देने के साथ-साथ कहानी और उसके ट्रीटमेंट को भुला दिया जाता है। ‘लव स्टोरी 2050’, ‘द्रोणा’, ‘ब्लू’, ‘काईट्स’ आदि इसके उदाहरण हैं। डिजास्टर मूवी में ‘ब्लू’ को नंबर 1 माना जाना चाहिए। बिना बात के प्रचार की वजह से 90 के दशक में आयी ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ ताश के पत्तों की तरह ढह गयी थी। ‘काइट्स’ और ‘मंगल पांडेय’ महंगी होने के बावजूद दर्शकों को आकर्षित नहीं कर सकीं थीं।

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