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10 जुलाई, 2020|11:38|IST

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त्योहारों की पाठशाला बने लाइफ झिंगालाला

त्योहारों की पाठशाला बने लाइफ झिंगालाला

दोस्तो, तुम तो हर त्योहार की तैयारी बड़े जोर-शोर से करते हो। हां, कुछ बड़े जरूर कहते हैं कि क्या होते हैं त्योहार! कुछ भी तो नहीं, सिर्फ एक दिन की छुट्टी। ये कोई तुम से पूछे कि रक्षाबंधन अभी गया नहीं कि तुम्हारी टोली जन्माष्टमी की तैयारी पर जुट गई। तुम्हारी प्लानिंग होने लगी है कि राधा कौन होगी तो कृष्ण कौन। कैसे उस दिन को एन्जॉय करेंगे इस पर चर्चा होने लगी है। सच ही तो है कि इन एक्टिविटीज से हम जिंदगी जीने के अनेक फॉर्मूले खेल-खेल में सीख जाते हैं। इस समय एक के बाद एक त्योहार हमें खुशियां देने के लिए तैयार हैं। रक्षाबंधन के बाद जन्माष्टमी, नवरात्रे, करवा चौथ, धनतेरस, दशहरा, दीवाली, क्रिसमस और नए वर्ष का स्वागत भी तो किसी त्योहार से कम नहीं होता।

स्कूल, टय़ूशन के अलावा तुम इन दिनों कुछ बिजी लग रहे हो। पापा भी तो ऑफिस से सीधा मार्केट ही जाते हैं। इन दिनों मौसम कुछ बदला-बदला रहता है। अरे हम सर्दी-गर्मी-बरसात की बात नहीं कर रहे। हमारे कहने का अर्थ है कि हर कोई इन दिनों त्योहारों के लिए व्यस्त है। तुम सोच रहे होगे कि इस बार किस त्योहार पर कौन से परिधान पहनें। या फिर मम्मी से कौन-कौन सी डिशेज की फरमाइश करें। साथ ही हमारा मन होता है कि हमारा घर त्योहारों में सबसे सुंदर हो। धीरे-धीरे चल रही जिंदगी में अचानक ये तेजी बड़े कमाल की है। यकीन मानो इन दिनों महसूस हो रही उमंग व ताजगी इन्हीं त्योहारों के कारण है। फैंड्र्स इन दिनों कोई हमारे लिए तोहफा लाता है तो चेहरे पर खुशी साफ दिखती है।

तुम्हें नहीं लगता कि इन दिनों ढेर सारी परेशानियों के होते हुए भी हर कोई खुश दिखता है। यही तो त्योहारों का मैजिक है दोस्त। कुछ क्रिएटिव फैंड्र्स तो खूबसूरत रंगोली से घर ही सजा देते हैं। ये फेस्टिवल ही तो हैं, जो हमें अपनों से मिलाते हैं। जरा याद करो, जो बहुत साल बाद बुआ तुम्हारे पापा से राखी वाले दिन मिलीं। दोनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक रहे थे। जरा सोच कर देखो हमारी जिंदगी से ये त्योहार निकल गए तो हमारी जिंदगी कितनी बोर हो जाएगी। आजकल मार्केट की सजावट देख नजर नहीं हटती। बाजारों की रौनक भी हमारे अंदर उत्साह का संचार करती है। मजे की बात है कि त्योहार में घर के लिए कुछ भी करना बोझ नहीं लगता। हम खुद ही इंटीरियर डिजाइनर बन जाते हैं। और ऐसे में घर की कोई तारीफ कर दे तो हम तो उड़ने लगते हैं।

इन दिनों हर कोई आस्थामय हो जाता है। ईश्वर से अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती मां अपनों के लिए सब कुछ मांग लेना चाहती है। जो पूरे वर्ष किसी धार्मिक स्थल या फिर घर पर ही बने मंदिर में जाने से बचते हैं, वे भी इन दिनों मस्तक नवाते हैं। एकाग्र होकर ध्यान लगाना हमें अपने जीवन में आने वाली कठिनाई के लिए मजबूत करता है। आने वाले दिनों में कुछ ऐसे त्योहार भी आएंगे, जो एक दूसरे के लिए त्याग की भावना को सामने लाएंगे। घर का हर कोई सदस्य एक दूसरे के लिए कुछ न कुछ करना चाहता है। या यूं कहें कि दूसरों के लिए जीना भी यही त्योहार सिखाते हैं। दीवाली पर कई लोग अपने बहीखातों की भी शुरुआत करते हैं। विश्वास यही होता है कि जो भी हम कार्य शुरू कर रहे हैं, वह शुभ हो। हमे आशावादी भी यही त्योहार बनाते हैं।

जिम्मेदारी का अहसास कराता रक्षाबंधन

रक्षाबंधन पर हमने बेन 10, निंजा हथौड़ी जैसे कैरेक्टर की राखियां बंधवाईं। इसने हमें ढेर सारी खुशियां दीं। राखी के बारे में कहा जाता है कि इस पर लगा एक-एक पवित्र धागा हमसे कुछ मांगता है। जैसे, हर हाल में अपनी बहन का साथ देना। आज हम भले ही छोटे हैं, मगर बड़े होने पर भी अपनी बहन का साथ देते रहेंगे। खुशियों का यह त्योहार जिम्मेदारी व दूसरों का ख्याल रखने का संदेश देकर गया।

संयम का पाठ पढ़ाएगी जन्माष्टमी

कुछ ही दिन बाद जन्माष्टमी है। इस दिन तुम्हारी टोली दिन भर बहुत सी एक्टिविटीज में व्यस्त रहती है। इस दिन लोग मंदिर जाते हैं और पूरे दिन का उपवास भी रखते हैं। कृष्ण के जन्म के समय यानी रात के 12 बजे ही कुछ खाते हैं। यह त्योहार हमें आत्मसंयम व खुद पर नियंत्रण रखना सिखाता है।

लड़कियों का सम्मान सिखाते नवरात्रे

स्त्री हो या कोई पुरुष, नौ दिन तक उपवास रखने के बाद आखिरी दिन कंजिकाएं जिमाई जाती हैं। उनके जल से पांव धोकर उनका घर में स्वागत किया जाता है। वे नौ कन्याएं उस घर के लिए खास होती हैं। दुर्गा के नौ रूप उन्हीं कन्याओं को समझा जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति तब तक कुछ नहीं खाते जब तक कि कंजिकाओं को स्वादिष्ट भोजन न करवा दें। भक्तिमय माहौल के साथ लड़कियों के सम्मान का संदेश भी नवरात्रे देते हैं।

त्याग की भावना है करवा चौथ में

तुमने देखा होगा कि इस दिन महिलाएं भूखी- प्यासी रहती हैं। खुद कष्ट झेल कर ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि उनके पति की लम्बी आयु हो। वह खुद के लिए कुछ नहीं मांगती। दूसरों के लिए मन्नत व त्याग का पाठ हमें करवा चौथ भी पढ़ाता है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा झूठा-फरेबी इंसान कितना ही ताकतवर क्यों न हो, एक दिन उसका अंत होना तय है। रावण के बारे में कहा जाता था कि वह बहुत बड़ा विद्वान और बलवान था। लेकिन बुरी आदतों व व्यवहार के कारण उसका अंत हो गया। आज भी रावण रूपी इंसान हमारे ही बीच हैं। जो लोग अपनी उन्नति के बारे में सोचने की बजाए दूसरों को नीचा दिखाने में अधिक रुचि लेते हैं, वे एक दिन मुंह के बल गिरते हैं। यह त्योहार हमसे कहता है कि दूसरों की बुराई न कर हमेशा सच्चई के रास्ते पर चढ़ते चलने में मंजिल मिलेगी।

वचन निभाने की याद दिलाए दीवाली

तुम जानते ही हो कि इस दिन श्रीराम 14 साल का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। एक पुत्र ने अपने पिता को दिए वचन को निभाया। उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने सदा अपने भाई का साथ देने का वचन निभाया। पत्नी ने हर हाल में पति का साथ दिया। छोटे भाई भरत ने श्रीराम की चरण पादुकाओं को पूजते हुए अयोध्या में ही रहने का वचन निभाया। यह त्योहार हमें याद दिलाएगा कि क्या हम अपने वचनों को निभाते हैं!

नया साल नई ताजगी

साल के पहले दिन व 31 दिसम्बर को लोगों में भरपूर उत्साह होता है। मन में यही होता है कि नया साल नई-नई खुशियां लाएगा। बीते साल की बुरी यादों को यहीं भूलना चाहते हैं। अगर जो ताजगी और उत्साह साल के पहले दिन होता है, वही साल भर रहे तो प्रगति की रफ्तार कितनी तेज होगी।

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