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ढूँढ़े नहीं मिल रहे बीपीएल कार्ड वाले

मलिन बस्ती कश्यप नगर में एलडीए की टीम ने 38 मकानों का सव्रेक्षण किया लेकिन यहाँ रहने वालों में से किसी के पास बीपीएल कार्ड नहीं मिला। सभी के पास एपीएल था। कुछ बस्तियों में झुग्गियों में रहने वाले लोगों के पास तो राशन कार्ड ही नहीं मिला। ऐसी बस्तियाँ भी मिलीं जहाँ 50 से 60 वर्ग मीटर में पक्के मकान बने थे। यहाँ दिक्कत यह है कि जमीन अधिकतम 30 वर्ग मीटर ही देनी है। ऐसे में पक्के मकान गिराने पड़ेंगे। अब एलडीए के इांीनियर और अफसर हैरान हैं कि गरीबों को मकान कैसे दें? योजना में सरकार ने जो शर्ते रखी हैं उनके मुताबिक तो गरीब ढँूढ़े नहीं मिल रहे।ड्ढr लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने सर्वजन हिताय गरीब आवास मालिकाना हक योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत मलिन बस्तियों में रहने वाले गरीबों को उनकी ही जमीन पर 30 वर्ग मीटर तक का पट्टा देकर उन्हें मकान मालिक बनाना है। इसके पहले चरण में एलडीए ने मलिन बस्तियों का सव्रेक्षण और वहाँ रहने वालों की संख्या का आँकलन किया। साथ ही बुधवार से मौके पर जाकर पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू की। इन कॉलोनियों में फार्म भरवाने पहुँचे अफसर और इांीनियर परेशान हैं कि वे गरीबों को कहाँ से ढँूढ॥कर लाएँ। एक इांीनियर के नेतृत्व में टीम ने कश्यप नगर में सव्रेक्षण किया। यहाँ सभी 38 लोगों के पास एपीएल कार्ड था। यहाँ दूसरी समस्या यह थी कि किसी के पास सात वर्ग मीटर जमीन थी तो किसी के पास 30 वर्ग मीटर। इस योजना में सभी को 15 से 30 वर्ग मीटर तक ही जमीन का पट्टा दिया जाना है। अब सात वर्ग मीटर वाले को 15 वर्ग मीटर से अधिक का पट्टा कैसे दिया जाए। इसी तरह अम्बेडकर नगर में लोगों के मकान 50 से 60 वर्ग मीटर जमीन पर बने हैं। जमीन 30 वर्ग मीटर ही दी जानी है। ऐसे में उनके मकानों को गिराकर ही इतनी जमीन दी जा सकती है। फरीद नगर में जब एलडीए की टीम पहुँची तो वहाँ काफी गरीब लोग दिखे जो झुग्गियों में रह रहे थे लेकिन उनके पास किसी तरह का राशन कार्ड ही नहीं था। एलडीए की करीब 50 टीमों ने दिन भर ऐसी ही बस्तयों में दिन भर माथापच्ची की। उनकी समस्या यही थी कि इन बस्तियों में उन्हें गरीब नहीं मिल रहे। गरीब भी उन्हें उसी मानक के अनुसार खोजने हैं जो शासन ने तय किए हैं। कुछ अफसरों का कहना था कि इस तरह तो पूरे लखनऊ में 500 गरीब खोजना भी मुश्किल होगा। इस बारे में एलडीए उपाध्यक्ष मुकेश कुमार मेश्राम का कहना है कि इस बारे में शासनादेश में नियम तय हैं। हम इन नियमों के अन्तर्गत आने वाले हर व्यक्ित को लाभ पहुँचाएँगे। ड्ढr ं

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