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सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाये रखना प्राथमिकता: चिदंबरम

सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाये रखना प्राथमिकता: चिदंबरम

सांप्रदायिक शांति और सदभाव बनाए रखने को सरकार की मुख्य प्राथमिकता बताते हुए गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि वह इस बात से काफी दुखी हैं कि छोटी-छोटी बातों और विवादों को लेकर समुदायों और समूहों के बीच टकराव हो जाता है।

चिदंबरम ने राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों के तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के लोग विशेषकर संवेदनशील हैं।

उन्होंने कहा कि इस बात से अवश्य संतोष है कि पिछले 12 महीने में सांप्रदायिक या जातीय हिंसा की कुछ खास घटनाएं नहीं हुई हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सतर्कता बरतने की अपील की।

गृहमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिक या जातीय हिंसा के मामलों में स्थिति से मजबूती से निपटने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को तैनात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को रोकने के लिहाज से सबसे अच्छा रिकार्ड पूर्वोत्तर राज्यों में देखने को मिला है, जहां 2010 में घटनाओं में नाटकीय रूप से कमी आई है हालांकि मणिपुर और असम में आर्थिक नाकेबंदी हुई, बंद और हिंसा देखने को मिली।

चिदंबरम ने बातचीत से दूर रहने वाले विभिन्न समूहों से अपील की कि वे बातचीत की पेशकश को स्वीकार करें और सरकारी प्रतिनिधियों से वार्ता शुरू करें। उन्होंने यकीन जताया कि विभिन्न समूहों की मांग को लेकर भारतीय संविधान के दायरे में ही समाधान निकल सकता है। इसका बेहतरीन उदाहरण बोडो क्षेत्रीय परिषद है, जो असम में स्वशासन का आदर्श बना।

आतंकवाद से निपटने के उपायों की चर्चा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि हमने सीमा पार से आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाई। क्षमता विस्तार करने, खुफिया नेटवर्क मजबूत करने, विशेष बल तैयार करने, आधुनिक हथियार अधिग्रहीत करने, बेहतर प्रशिक्षण देने और आतंकवाद से निपटने के अन्य उपाय भी किए।

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