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कश्मीर में अभी भी हालात चिंताजनकः चिदंबरम

कश्मीर में अभी भी हालात चिंताजनकः चिदंबरम

जम्मू-कश्मीर के हालात को असामान्य बताते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को इस बात पर अफसोस जताया कि राज्य में हम अभी दुश्चक्र से बाहर नहीं निकल सके हैं। उन्होंने हालांकि उम्मीद जतायी कि आने वाले कुछ दिन में कोई ऐसा रास्ता निकलेगा, जिसमें प्रदर्शनकारियों से संपर्क कर बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरू की जा सकेगी।

चिदंबरम ने राज्यों के पुलिस मुखियाओं के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि 2005 की शुरुआत से, इसमें 2008 अपवाद है, जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी अनुकूल रही है। केवल कुछ घटनाएं हुइ और जानमाल की भी काफी कम क्षति हुई। दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से इस साल जून से घटनाओं में अप्रत्याशित बदलावा आया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में हम पथराव, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ने, फायरिंग जैसे दुश्चक्र में फंस गए हैं। इसके परिणामस्वरूप पथराव की और घटनाएं हो रही हैं। हालांकि सुरक्षाबलों को अधिकतम संयम बरतने के निर्देश हैं, लेकिन हालात अब तक सामान्य नहीं हुए हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार इस बात को भलीभांति जानती है कि जम्मू-कश्मीर में समस्याओं का राजनीतिक समाधान खोजना होगा। केन्द्र सरकार ने राज्य के सभी लोगों, वर्गों, राजनीतिक दलों और संगठनों से बातचीत की पेशकश की है।

उन्होंने कहा कि यह चिन्ता का विषय है कि हम उस दुश्चक्र से निकल नहीं पाए हैं, जिसमें राज्य फंसा हुआ है हालांकि मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हम कोई ऐसा रास्ता निकाल लेंगे, जहां से हम प्रदर्शनकारियों से संपर्क कर वार्ता की प्रक्रिया फिर से शुरू कर सकेंगे, जिससे समस्याओं का कुछ समाधान निकल सकेगा।

चिदंबरम ने कहा कि 2009 में और 2010 के शुरुआती आठ महीनों में देश के बाहर और भीतर विद्वेषपूर्ण शक्तियों ने सुरक्षा हालात को गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि पुणे में जर्मन बेकरी पर हुए हमले को छोड़कर पिछले 21 महीने में कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ। उन्होंने उम्मीद जताई कि जर्मन बेकरी मामले के अभियुक्त भी जल्द पकडे़ जाएंगे।

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