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सड़कों पर ठहर गई जिंदगी

गुस्सा सरकार पर और फजीहत हुई पब्लिक की। बुधवार को राजधानी की सड़कों पर सरकार के खिलाफ करीब आधा दर्जन संगठनों के जुलूस और धरना-प्रदर्शन के कारण जिंदगी ठहर गई। ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई और लोग सड़क पर पसीना बहाते रहे। मेन रोड हो या लिंक रास्ते। हर जगह जाम में वाहनों की लंबी कतार लगी थी। सायरन बजाने के बावजूद अशोक राजपथ पर एम्बुलेंस का भी आगे बढ़ना आसान नहीं था। दिन के 11 बजे से ही विभिन्न इलाकों में वाहनों का रंगना या लोगों का पैदल सड़क पार करना भी मुश्किल हो गया।ड्ढr ड्ढr अशोक राजपथ, एक्जीबिशन रोड, बाकरगंज, बोरिंग रोड आदि इलाके में प्राइवेट स्कूलों की बड़ी बसों के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई। जाम में फंसे स्कूली बसों में बैठे बच्चे भूख-प्यास से हलकान रहे। करीब तीन बजे आलम यह था कि एक्जीबिशन रोड की ओर जा रहे एक पुलिस अधिकारी जाम की स्थिति देख अपनी जीप को वापस लौटा पैदल ही गये। बेली रोड, आयकर गोलंबर, वीरचंद पटेल पथ, डाकबंगला चौराहा, फ्रजर रोड, एक्जीबिशन रोड, पीरमुहानी, बाकरगंज-हथुआ मार्केट रोड, स्टेशन रोड, बुद्ध मार्ग, जी.पी.ओ. गोलंबर आदि मुख्य सड़कों पर देर शाम तक जाम लगा रहा। न्यू डाकबंगला रोड में मिले मोटरसाइकिल सवार शिक्षक अभिजीत शर्मा (लालजी टोला) ने जाम के लिए पुलिस व प्रशासन को दोषी ठहराते हुए प्रमुख मार्गो में आंदोलन पर प्रतिबंध और आंदोलनकारियों को अलग जगह देने की मांग की।ड्ढr ड्ढr जे.पी. गोलंबर (गांधी मैदान) से जंक्शन गोलंबर पहुंचने में अभिजीत को 5-7 मिनट की जगह 45 मिनट लग गये। इधर आर.ब्लॉक गेट बंद होने से विशेषकर गर्दनीबाग, अनीसाबाद, फुलवारीशरीफ, मीठापुर, आदि इलाके के लोगों को आने-जाने में परशानी हुई। दोपहर तक तो एक ही गेट बंद था और दूसर भाग से आवागमन जारी था। हालांकि बाद में हजारों प्रदर्शनकारियों के जुटते ही पुलिस ने दोनों गेट बंद कर दिये।ं

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