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अहंकार छोड़ने से ही सफलता

हमें हनुमान जी के प्रति समर्पित होना होगा। आदमी को किसी के सामने याचना नहीं करनी चाहिए। प्रभु से बल और बुद्धि की याचना करं। ये बातें आध्यात्मिक गुरु आचार्य विजय ने 28 जनवरी को कहीं। वे सेवा सदन पथ स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर सभागार में उपस्थित भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे।ड्ढr उन्होंने कहा कि हमें अहंकार पर विजय पाना होगा। अहंकार से मुक्त होकर ही हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य विजय ने हनुमान चालीसा की विस्तार से व्याख्या की। सुमिरण, नमन, प्रार्थना का महत्व बताते हुए कहा कि ये सारी बातें एक हनुमान चालीसा के पाठ से पूर्ण हो जाती हैं। आचार्य जी ने कहा कि दृष्टि दो प्रकार की होती है। एक आंख की दृष्टि और दूसरी मन की दृष्टि। आंख की दृष्टि से हम जो नहीं देखना चाहते हैं, वह भी देखना पड़ता है। मन की दृष्टि में मन जैसा चाहेगा, वैसा ही हम देख सकेंगे। कार्यक्रम के प्रारंभ में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। प्रवचन का कायक्रम दो फरवरी तक चलेगा। समय अपराह्न् तीन से संध्या छह बजे तक निर्धारित है।

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