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कार्यकर्ताओं ने ‘सरकार’ पर चलाए तीर

शिविर के दूसर दिन मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं का मन-मिजाज पढ़ते-भांपते रहे। कार्यकर्ताओं की बातों में उन्होंने ‘विकास’ का यथार्थ भी ढूंढा। यहां तक कि एक उग्र महिला कार्यकर्ता को रोकने के लिए बढ़ रही दूसरी महिला नेत्री को भी उन्होंने रोक दिया। सबको खुलकर ‘सुनाने’ का अवसर दिया।ड्ढr वैसे ‘अमृत’ की तलाश में कार्यकर्ताओं के साथ मंथन में जुटी पार्टी को ‘विषपान’ भी करना पड़ा। जदयू के तीन दिवसीय राज्यस्तरीय शिविर के दूसर दिन कार्यकर्ताओं ने ‘सरकार’ पर जमकर ‘तीर’ चलाए। उसके निशाने पर सरकार, मंत्री, विधायक से लेकर ‘बड़े लोग’ भी रहे।ड्ढr ड्ढr मुख्यमंत्री को कार्यकर्ताओं ने ‘क्लीन-चिट’ दी और सरकार से सम्मान दिलाने के लिए उन्हें पंच बनाया। हालांकि कुछ कार्यकर्ताओं ने उनतक नहीं पहुंच पाने की अपनी पीड़ा का भी इजहार किया। बेहतर कार्यो के लिए नीतीश सरकार की सराहना भी हुई। भ्रष्टाचार, घूसखोरी, कमीशनखोरी और नौकरशाही को लेकर कार्यकर्ताओं में गुस्सा था। कार्यकर्ताओं के तमाम गिले-शिकवे जार्ज फर्नाडीस , शरद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ध्यान से सुने। कार्यकर्ताओं की मुराद पूरी हो रही थी क्योंकि उन्हें पहलीबार अपनी पूरी बात ‘ऊपर’ तक पहुंचाने के लिए पार्टी का सर्वोच्च मंच मिल गया था। इस प्रकार दूसरा दिन पूरी तरह कार्यकर्ताओं के हवाले रहा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कार्यकर्ताओं को ‘अभिव्यक्ित’ की पूरी आजादी दी थी। न कोई रोक न टोका-टोकी। हालांकि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने ‘विकास’ की रोशनी गांव के सुदूर खेत-खलिहानों तक पहुंचाने का दावा किया और कहा कि नीतीश सरकार ने पिछली सरकार के 15 वर्षो के ‘अभिशाप’ को तीन वर्षो में ही ‘अवसर’ में बदल दिया है।ड्ढr ड्ढr बगहा के राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि अफसरशाही लोगों की पीड़ा मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचने देती हैं। रामनंदन कुमार के अनुसार हर स्तर पर कार्यकर्ताओं की हकमारी हो रही है। फूदन राय मुख्यमंत्री को तो ‘बेजोड़ व शानदार’ बताए, लेकिन मंत्री-विधायकों पर उनका भरोसा नहीं था। डा. गीता आर्य ने कहा कि महादलित की उपेक्षा हुई तो ‘कुर्सी’ डगमगा जाएगी। अजरुन पटेल की पीड़ा है कि मुख्यमंत्री की गणेश परिक्रमा करने का अवसर बड़े लोगों को ही प्राप्त है। अनिल कुशवाहा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को समस्या सुनाने पर मुकदमा झेलना पड़ता है। मो. नसीम अख्तर ने मौजूदा सरकार को उम्मीदों की रोशनी बताया तो सपना चोपड़ा ने कहा कि पहली बार महिलाओं को मुख्य धारा में लाने की सफल कोशिश हुई।ं

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