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जनता के दर्द में भी बेफिक्री दिखाने में जरदारी अव्वल

जनता के दर्द में भी बेफिक्री दिखाने में जरदारी अव्वल

एक कहावत है, 'जब रोम जल रहा था तो नीरो चैन की बंसी बजा रहा था' और शायद इसी से प्रेरित होकर प्रतिष्ठित पत्रिका फॉरेन पॉलिसी ने ऐसे प्रभावशाली लोगों की सूची बनाई है जो सबसे ज्यादा जरूरत के वक्त अनुपस्थित रहे। इसमें अव्वल आए हैं पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी।

पत्रिका ने ऐसे प्रभावशाली लोगों की सूची तैयार की है जो संकटकाल में जनता की जरूरत के समय उनसे दूर रहे हैं। हाल में पाकिस्तान में बीते 80 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ आई है और प्रभावित लोग त्राहि माम कर रहे हैं।

पत्रिका फॉरेन पालिसी में जरदारी के बारे में कहा गया है कि जब देश में करोड़ों लोग बाढ़ के कारण त्राहि माम कर रहे हैं और राजनीतिक हिंसा से सैंकड़ों प्रभावित हैं तो वह यूरोप के भ्रमण पर निकल गए। पत्रिका के अनुसार इस तरह की प्राकृतिक अपादाओं के समय एक वैश्विक नेता के लिए राहत कार्यों की देखरेख करना या कम से कम पीड़ितों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करना अच्छा होता है।

लेकिन पाकिस्तान के राष्ट्रपति के लिए शायद यूरोप के साथ रिश्ते प्रगाढ़ करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों की उस अपील की परवाह भी नहीं की, जिसमें उनसे तामझाम वाले दौरे पर रोक पर नहीं जाने के लिए कहा गया था। जरदारी जिस होटल में रूके हैं उसमें एक रात ठहरने का खर्च कथित तौर पर 11000 डॉलर से अधिक आता है।

जरदारी के अधिकारियों ने इन आरोपों पर पलटवार किया है। पत्रिका ने लिखा है कि अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति ने ठहरने के लिए लंदन में चर्चिल हयात रीजेंसी जैसा सबसे सस्ता पांच सितारा होटल चुना था और सोने के लिए रॉयल सुइट का विकल्प भी नहीं लिया।

ब्रिटेन में दौरे के समय एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति पर 60 वर्षीय एक ब्रिटिश पाकिस्तानी प्रदर्शनकारी ने जूता फेंका था। जरदारी उस समय भाषण दे रहे थे। राष्ट्रपति के ब्रिटेन से स्वदेश नहीं लौटने के निर्णय के विरोध में उसने यह जूता फेंका था। जरदारी 18 अगस्त तक देश से बाहर रहे। उन्होंने इस दौरान काले सागर में स्थित रिसोर्ट में रूस, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ सुरक्षा शिखर बैठक में शिरकत की ।

पत्रिका ने लिखा है कि जरदारी को सुध हुई तो उन्हें दोपहर के भोजन के लिए रुकना भी नागवार गुजरा और बैठक समाप्त होते ही रवाना होने का निर्णय किया। इस विचित्र सूची में शुमार होने वाले अन्य लोगों में मास्को के महापौर युरी लुझकोव भी है। जब लुझकोव का शहर दावानल की विभीषिका झेल रहा था तो महापौर महाशय कुछ थेरेपी ले रहे थे।

हैती के राष्ट्रपति चुनाव में कूदने वाले छैला बाबू वाइक्लेफ ज्यां भी इस विचित्र सम्मान से नवाजे गए हैं। पत्रिका ने इन महाशय के बारे में फरमाया है कि भूकंप से प्रभावित हैती में जब युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य चल रहा था तो ये कहीं दुबके हुए थे। बीपी के सीइओ टॉनी हेवार्ड और ब्रिटेन के सबसे बड़े मजदूर संघ के महासचिव टॉनी वूडले को भी इस सूची में शामिल किया गया है।

जब मेक्सिको की खाड़ी में तेल रिसाव के महासंकट से बीपी जूझ रहा था तो हेवार्ड वाइट द्वीप में सैर सपाटा कर रहे थे। वहीं टॉनी वूडले की खबर लेते हुए पत्रिका ने इनके बारे में लिखा है कि ब्रिटिश एयरवेज जब हड़ताल और बंदी जैसी स्थिति से जूझ रहा था तो वह भूमध्यसागर में स्थित एक द्वीप में एक विला में चैन की बंसी बजा रहे थे।

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