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सकल मुद्रास्फीति चार माह बाद इकाई अंक में

सकल मुद्रास्फीति चार माह बाद इकाई अंक में

कुछ खाद्य और गैर खाद्य वस्तुओं के सस्ता होने से थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर जुलाई माह में घटकर 9.97 प्रतिशत पर आ गई है। एक माह पहले जून में यह 10.55 प्रतिशत पर थी।

वहीं अप्रैल माह के लिए महंगाई की दर को शुरुआती 10.16 प्रतिशत से संशोधित कर 11.14 प्रतिशत कर दिया गया है। पिछले चार माह से महंगाई दर दो अंकीय बनी हुई थी।

जुलाई माह में प्याज की कीमतों में पिछले साल के इसी माह की तुलना में 6.85 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि खाद्य तेल 0.34 प्रतिशत सस्ता हुआ। साल दर साल आधार पर सब्जियों के दाम 14 प्रतिशत गिरे, जबकि आलू 44 प्रतिशत सस्ता हुआ।

इस दौरान सीमेंट की कीमतों में 8.36 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि अधातु खनिज उत्पादों के दाम 4.81 प्रतिशत घट गए।

इस दौरान खाद्य वस्तुओं का सूचकांक 0.9 प्रतिशत बढ़ा। आलू, प्याज और अन्य सब्जियों की कीमतों में गिरावट का असर अनाज, चावल, दलहन, दूध और फल के दाम बढ़ने से जाता रहा।

अनाज के दाम में साल दर साल आधार पर जहां 6.17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं चावल 6.28 प्रतिशत, दालें 21.98 प्रतिशत, दूध 18.06 प्रतिशत और फल 9.52 प्रतिशत महंगे हुए।

प्राथमिक खाद्य पदार्थों में मूंग की कीमतों में चार प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मसूर, अरहर और समुद्री मछली के दाम एक-एक प्रतिशत घट गए। खाद्य मुद्रास्फीति 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में एक बार फिर दो अंक 11.40 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इससे पिछले दो सप्ताह यह एक अंक में रही थी।

जुलाई माह में ईंधन सूचकांक 3.2 प्रतिशत बढ़ गया। केरोसिन की कीमतों में जहां 24 प्रतिशत का इजाफा हुआ, वहीं एलपीजी के दाम आठ प्रतिशत बढ़े। सरकार ने जून के आखिर में पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रणमुक्त कर दिया था, जबकि डीजल, एलपीजी और केरोसिन के दामों में बढ़ोंतरी की गई थी।

हालांकि, इस दौरान फर्नेस तेल के दामों में दो प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि नाफ्था तथा लाइट डीजल तेल एक-एक प्रतिशत सस्ते हुए।

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