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लोक सभा चुनाव में राष्ट्रीय गठबंधन नहीं:कांग्रेस

अगले लोकसभा चुनाव में यूपीए नजर नहीं आएगा। केंद्र में यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने साफ किया है कि इस चुनाव में सहयोगी दलों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर न तो कोई गठबंधन होगा और न साझा घोषणापत्र जारी होगा। साझा अपील जरूर जारी हो सकती है। गुरुवार को यहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास पर उनकी ही अध्यक्षता में दो घंटे चली कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि पिछले चुनाव की तरह इस बार भी यूपीए के घटक दलों के साथ राज्य स्तर पर राजनीतिक स्थिति और आवश्यक्ता पर आधारित तालमेल किया जाएगा।ड्ढr ड्ढr यूपीए को समर्थन दे रहे कुछ नए सहयोगी दलों के साथ भी कांग्रेस सीटों का तालमेल कर सकती है लेकिन इस बारे में कोई भी फैसला संबद्ध प्रदेश इकाइयों को भरोसे में लेकर ही किया जाएगा। जिन राज्यों में किसी अन्य दल के साथ तालमेल नहीं होगा, वहां पार्टी अपने बूते चुनाव लड़ेगी। कुछ राज्यों में कांग्रेस और यूपीए के घटक दल आमने सामने भी हो सकते हें। मसलन महाराष्ट़् में कांग्रेस का एनसीपी से तालमेल होगा लेकिन गुजरात, केरल, मेघालय तथा कुछ अन्य राज्यों में दोनों आमने सामने हो सकते हें। इसी तरह से सपा के साथ कांग्रेस यूपी में तालमेल की पक्षधर है जबकि सपा महाराष्ट्र, बिहार तथा मध्य प्रदेश में भी चुनाव लड़ने की बात कर रही है।ड्ढr ड्ढr इसी तरह से राजद और लोजपा का बिहार में कांग्रेस से तालमेल होगा लेकिन कई अन्य राज्यों में वे आमने-सामने होंगे। एक नेता ने बताया, सही मायने में सिर्फ कांग्रेस और भजपा ही नेशनल पार्टियां हैं, बाकी सभी दल भले ही तकनीकी कारणों से राष्ट्रीय दल का दर्जा लिए हों, वे नेशनल नहीं बल्कि नोशनल हैं। यूपीए चुनाव से पहले का नहीं बल्कि बाद में सरकार चलाने के लिए बना एक गठबंधन है। सभी दल पिछली बार की तरह ही अपने-अपने घोषणापत्र के आधार पर चुनाव लड़ेंगे।ड्ढr ड्ढr यह पूछे जाने पर कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन नहीं करने का यह मतलब तो नहीं कि चुनाव के दौरान यूपीए का अस्तित्व नहीं रहेगा? श्री द्विवेदी ने कहा कि यूपीए का अस्तित्व तो है लेकिन न तो पिछला चुनाव इसके बैनर तले लड़ा गया था और न ही इस बार ऐसा होगा। कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव में युवाओं को अधिक संख्या में टिकट दे सकती है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में यह मांग उठी कि युवाओं को पार्टी की ओर आकर्षित करने के लिए युवा नेताओं को अधिक संख्या में चुनाव मैदान में उतारा जाना चाहिए। कुछ सदस्यों ने पार्टी के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा चुनाव से काफी पहले कर दिए जाने की मांग भी की।

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