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पहले पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा, अब जांच

प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों पर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कश्मीरी शालें एक्सपोर्ट करने वाले व्यापारी हशमत उल्लाह खान को जम्मू-कश्मीर राज्य से कला एवं संस्कृति के खाते में पद्मश्री मिला है। आमतौर पर आर्ट व कल्चर जैसे विषय पर राज्य सरकार की सिफारिश पर पद्मश्री बांटे जाते हैं। पर इस मामले में राज्य सरकार ने कोई सिफारिश ही नहीं भेजी। केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने इस आधार पर मामले में टिप्पणी करने से इंकार कर दिया कि अवार्ड सेलेक्शन कमेटी में कई दिग्गज हस्तियां थीं। खैर, इस खुलासे के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के हस्तक्षेप से मामले में जांच हो रही है। अब सभी एंट्रीा की जांच की जा रही है। हशमत उल्ला खान को गलत अवार्ड मिलने की सूचना से राष्ट्रपति भवन, गृह मंत्रालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव खुर्शीद गनी और आर्ट एवं कल्चर महकमे के सचिव जफर इकबाल ने कहा कि राज्य सरकार ने हशमत के नाम की सिफारिश नहीं की। वहां एक ही हशमत उल्ला खान हैं जो शेर कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर रहे हैं। वे आर्ट कल्चर बैकग्राउंड के हैं या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। राष्ट्रपति भवन के समक्ष यक्ष प्रश्न यह है कि हशमत का नाम किसने रिकमंड किया। पद्म पुरस्कार के लिए वैसे तो कोई भी गैर सरकारी संगठन, राजनीतिक या संस्था नाम रिकमंड कर सकती है। लेकिन इसके पुख्ता प्रमाण होने चाहिए कि किस फील्ड में उसने क्या कार्य किए हैं।ड्ढr ड्ढr सवाल उठता है कि एक्सपोर्टर ने क्या दावे पेश किए थे? 24 जनवरी को पुरस्कार की सूचना मिलने पर हशमत ने अपनी तरफ से मीडिया को प्रेस रिलीज जारी कर इसकी सूचना दी जिसमें उसके एफ-निजामुद्दीन वेस्ट के घर का पता दर्ज है। हशमत कहते हैं कि पुरस्कार की सूचना पर आश्चर्य हुआ। वह शॉल बुनकरों आदि के लिए 35 सालों से कार्य कर रहे हैं लेकिन उनके कार्य को सरकारी महकमे में कोई नहीं जानता। खुद खान को नहीं पता कि उनका नाम किसने रिकमंड किया?

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