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कलश यात्रा के साथ सतचंडी महायज्ञ शुरू

ायप्रकाशनगर, बूटी मोड़ में 2ानवरी को कलश यात्रा के साथ सात दिनी सतचंडी महायज्ञ शुरू हो गया। सुबह आठ बजे बड़ी संख्या में श्रद्धालु आयोजन स्थल पर एकत्रित हुए। वृंदावन से आये श्रीश्री 108 स्वामी देवानंद जी के सानिध्य में यज्ञाचार्यों ने विधिविधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद सवा दस बजे कलश यात्रा शुरू हुई। आगे-आगे हाथी-घोड़े और भक्ित धुन बजाते बैंड बाजा के कलाकार चल रहे थे। पीछे से श्रद्धालु और 21 सौ कलशधारी महिलाओं की लंबी कतार थी। अंत में सजे रथ पर सवार स्वामी देवानंद जी साथ चल रहे थे। साधु-संतों की टोली स्वामी जी के साथ थी। बूटी मोड़ पर राज्य की शांति और खुशहाली के लिए साधु-संतों द्वारा पूजा-अर्चना की गयी। आयोजन स्थल पर कलशधारी महिलाओं ने यज्ञ भूमि की परिक्रमा कर पवित्र जल से भर कलश को स्थापित किया। शाम चार बजे से भागवताचार्य हरिकौशल कृष्ण जी का प्रवचन प्रारंभ हुआ। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। यज्ञाचार्य रवि शास्त्री के निर्देशन में गोपाल शास्त्री, सुशील त्रिपाठी, कुांबिहारी शास्त्री, नित्यानंद, अजय, सुनील, बांके बिहारी शास्त्री, पंडित पवन पाठक, नंदकुमार पाठक और प्रमोद पाठक यज्ञानुष्ठान संपन्न कराने वालों में मुख्य थे। वरुण कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह, संजय सिंह, शशिभूषण ओझा और मिथिलेश इसमें सपत्नीक यजमान के रूप में हिस्सा लिया। वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह ने भी मुख्य रूप से इसमें अपनी भागीदारी निभायी। शत्चंडी महायज्ञ के लिए निकाली गयी शोभायात्रा का संचालन करने वालों में पवन सिंह, नीरा सिंह, राजदेव सिंह, सुरंद्र सिंह, मंटन, अवधेश, पंका, अनिल सिंह, पिंटू, भरत तिवारी मुख्य थे।ड्ढr भक्ित से प्रभु मिलते हैं : आचार्य विजयड्ढr हनुमान चालीसा हर दिन पढ़ें, इसका फल तत्काल मिलता है। जीवन से बुराइयां दूर हो जाती हैं। प्रभु की आराधना से बल और बुद्धि मिल जाये, तो मनुष्य सर्वोच्च शिखर पर पहुंच सकता है। उक्त बातें आध्यत्मिक गुरु आचार्य विजय ने 2जनवरी को कही। वह लक्ष्मी नारायण मंदिर सभागार में उपस्थित भक्तों के बीच हनुमान चालीसा विषय पर प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भक्ित का स्वरूप बदलना होगा। सच्ची भक्ित से ही प्रभु मिलते हैं। हनुमान से मिलने वाली प्ररणा को जीवन में उतारना होगा। आचार्य विजय ने प्रवचन के दौरान कहा कि राजा वो नहीं होता, जो गद्दी पर राज करता है। राजा वह होता है जो जनता के दिलों में राज कर। आजकल के नेताओं को यह बात समझ में आ जाये तो वे चुनाव हारं नहीं। हनुमान भक्तों के दिल में राज करते हैं। हमारा जीवन भी ऐसा होना चाहिए। तुम किसी के काम नहीं आओगे, तो तुम्हार काम कौन आयेगा। सुख-दुख का साथी ही असली राजा होता है।

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