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आस्था के केंद्र ही नहीं पौराणिक भी है शिवालय

भगवान शिव के प्रति आस्था लिए लाखों लोगों का सैलाब महाशिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़ेगा। ये शिवालय केवल लोगों की आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि इनका पौराणिक महत्व भी है। इतिहासकारों ने कई शिवलिंगों को बनावट के आधार पर प्राचीन बताया है। इसमें से अधिकांश गाजियाबाद में स्थित है।


महामना मालवीय शोध संस्थान के इतिहासकारों ने पश्चिमी यूपी के प्राचीन शिवलिंगों पर शोध किया और उसे ‘द जर्नल ऑफ द मेरठ यूनिवर्सिटी हिस्ट्री एल्यूमनी’ में प्रकाशित किया। एनएएस डिग्री कॉलेज मेरठ के इतिहासकार डॉ. देवेशचंद्र शर्मा ने बताया कि लोगों की आस्था के साथ-साथ ये शिवमंदिर काफी प्राचीन है। इनमें गाजियाबाद का दूधेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना तो लंकापति रावण के पिता विश्रवा मुनि ने की थी और खुद रावण भी शिवजी की पूजा करता था। इस किवदंती के अलावा ये शिवमंदिर एक टीले पर स्थापित होने के कारण भी प्राचीन हैं। इतिहासकार डॉ. कृष्णकांत शर्मा व शोध छात्र हरीश ने बताया कि गढ़मुक्तेश्वर के झड़ीना गांव के जंगल में एक ऊंचे टीले पर मोटा महादेव शिवलिंग स्थापित है। विशाल होने के कारण इसे मोटा महादेव कहा जाता है। यह शिवलिंग 27 इंच लंबा और 60.5 इंच मोटा है। लाल बलुए पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग ज्यामितीय दृष्टिकोण से अद्भुत है। टीले के आसपास प्राचीन बर्तन व मूर्तियां भी मिली है। मोटा महादेव मंदिर से दो किमी दूर सिद्ध बाबा मंदिर है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार के पास किसी प्राचीन मंदिर का टूटा हुआ भाग जमीन में गड़ा है। गढ़ क्षेत्र में कल्याणपुर गांव के जंगल में कल्याणेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। यह शिवलिंग भी लाल बलुए पत्थर से बना है। यह शिवलिंग लाल पत्थर से बनी जलहरी के बीच में बने खांचे में फंसाया हुआ है, जो अति प्राचीन है। गढ़ क्षेत्र में नहुष की बाबड़ी (नक्का कुआं) के प्रांगण में मुक्तेश्वर महादेव स्थापित है। किवदंती है कि यह शिवलिंग युधिष्ठिर ने स्थापित किया था। इससे थोड़ी दूर पर झारखंडेश्वर महादेव मंदिर स्थापित है। यह मुक्तेश्वर महादेव मंदिर जैसा है। शिवलिंग पिलखन के पेड़ के नीचे स्थापित है। इसी तरह से बुलंदशहर में गंगा तट पर आहार नामक गांव में अंबकेश्वर महादेव शिवमंदिर स्थित है। यह शिवलिंग खंडित है। यह शिवलिंग भी लाल बलुआ पत्थर से बना है। हापुड़ के लालपुर गांव में श्यामेश्वर महादेव शिवलिंग स्थापित है। यह शिवलिंग 24 इंच लंबा व 40 इंच मोटा है। यह मंदिर करीब 350 वर्ष पुराना है। इसी तरह से हापुड़ क्षेत्र में सबली गांव में सबली महादेव मंदिर स्थित है। हापुड़ शहर के मध्य तगासराय में प्राचीन महादेव मंदिर है। इसका निर्माण 1271 ईसवीं में हुआ था।

प्राचीन शिव मंदिर
दूधेश्वर महादेव मंदिर, पुरा महादेव मंदिर, ओघड़नाथ मंदिर, मोटा महादेव मंदिर, सिद्ध बाबा शिव मंदिर, कल्याणेश्वर महादेव मंदिर, मुक्तेश्वर महादेव मंदिर, झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, अंबकेश्वर महादेव मंदिर, श्यामेश्वर महादेव मंदिर, सबली महादेव मंदिर, प्राचीन महादेव मंदिर, सुराना का महादेव मंदिर।

संरक्षण के प्रयास होंगे
इतिहासकारों ने बताया कि इन प्राचीन शिवलिंगों के संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। महामना मालवीय शोध संस्थान ने पुरातत्व विभाग को इन प्राचीन मंदिरों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग की है और इनकी देखरेख के लिए फंड जारी किया जाए। डॉ. देवेशचंद्र शर्मा ने बताया कि संस्थान अपने स्तर पर भी प्राचीन मंदिरों के संरक्षण पर काम करेगा।

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