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खाप ने 22 साल बाद सामाजिक बहिष्कार वापस लिया

हरियाणा के एक गांव की खाप पंचायत ने करीब 22 साल बाद वहां के एक परिवार का सामाजिक बहिष्कार वापस ले लिया है। परिवार को यह राहत इतनी देर से मिली है कि एक साल पहले इसके मुखिया और एक सदस्य का निधन भी हो चुका है।

हरियाणा के भिवानी जिले के बारवास गांव के निवासी चंद्रम ने अपने दो बेटों सज्जन सिंह और उमेद सिंह का विवाह राजस्थान के चुरु जिले के बेरान गांव की दो बहनों से कर दिया था।

इसके बाद बारवास खाप पंचायत ने चंद्रम पर सामाजिक मानदंडों और परंपराओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और उनके परिवार का अगस्त 1988 में सामाजिक बहिष्कार कर दिया। वैसे इस परिवार को गांव में रहने की इजाजत तो दे गई थी लेकिन गांव के किसी भी व्यक्ति को उनसे बात करने की अनुमति नहीं थी।

बारवास गांव के एक वरिष्ठ निवासी ने शनिवार को यहां बताया, ''बारवास गांव के निवासी श्योरां खाप से संबद्ध हैं और बेरान के ग्रामीण सिंडोलिया खाप से संबंधित हैं। श्योरां और सिंडोलिया खापों में भाईचारे का संबंध है और हम इन दो खाप पंचायतों में अपने बच्चों के विवाह नहीं कर सकते।''

चंद्रम और उनके भाई श्रीचंद का पिछले साल निधन हो गया। वैसे चंद्रम के छोटे भाई सुख लाल ने पंचायत से माफी मांगी है।

सिंडोलिया खाप पंचायत के एक सदस्य ने शनिवार को यहां बताया, ''सिंडोलिया खाप पंचायत ने गुरुवार को हुई एक बैठक में प्रभावित परिवार का बहिष्कार समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब परिवार के सदस्य गांव में यहां-वहां घूमने को स्वतंत्र हैं और वे किसी से भी बात कर सकते हैं।''

उन्होंने बताया, ''सुख लाल और चंद्रम के बेटों ने पंचायत के सामने माफी मांगी थी। उन्होंने वादा किया है कि वह भविष्य में सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन नहीं करेंगे।'' हरियाणा की खाप पंचायतों को एक जाति के बीच विवाह संबंधी मामलों में कुख्यात निर्णय लेने के लिए जाना जाता है। कई मामलों में खाप पंचायतों के कठोर सदस्यों ने सम्मान की खातिर कई युवा जोड़ों की हत्याएं की हैं।

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