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आउटसोर्स करने वाली कंपनियों को बाद में कठिनाई

विषम आर्थिक परिस्थितियों में कर्मचारियों की संख्या घटाने और आउटसोर्सिंग का अधिक सहारा लेने वाली कंपनियों को आगे चल कर अधिक कठिनाई उठानी पड़ती है। एक अध्ययन में यह खुलासा किया गया है।

अध्ययन में बोइंग और टोयोटा जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि इन कंपनियों ने कठिन समय में काम को आउटसोर्स किया, पर दीर्घावधि में उनकी यह रणनीति उनके लिए परेशनी की वजह साबित हुई।

आउटसोर्सिंग की वजह से बोइंग के महत्वपूर्ण 787 ड्रीमलाइनर कार्यक्रम में देरी हुई, वहीं टोयोटा को आउटसोर्स वाली इलेक्ट्रिकल प्रणाली तथा एक्सेलरेटर के मसले पर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

उताह विश्वविद्यालय के डेविड एक्सेलेस स्कूल ऑफ बिज़नेस के अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। इस अध्ययन की अगुवाई करने वाली प्रोफेसर लाइडा बिगेलो ने कहा कि कुल मिलाकर यह देखने में आया है कि ऐसी कंपनियां जो अपने आउटसोर्सिंग फैसलों में लेनदेन की लागत को शामिल नहीं करती हैं, उनकी असफलता की दर कहीं अधिक रहती है।

उन्होंने कहा कि कंपनियों को उत्पादन लागत से आगे बढ़कर अन्य लागत को देखने की ज़रूरत है। मसलन खराब गुणवत्ता, आपूर्ति में देरी तथा आपूर्तिकर्ता द्वारा दाम बढ़ाने का जोखिम।

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