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मील का पत्थर साबित होगी अटल आदर्श ग्राम योजना

उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार की अनदेखी अटल आदर्श ग्राम योजना यदि फलीभूत हुई तब वह दिन दूर नहीं जब देश के आदर्श राज्यों में उत्तराखंड भी स्थान होगा।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड के गांवों में सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल आदर्श ग्राम योजना शुरू की गई है। इस अनोखी पहल से राज्य की समूची तस्वीर संवारने के साथ ही यहां के विकोस में भी यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।

राज्य के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक की स्पष्ट सोच है कि गांवों के पूरी तरह विकासित हुए बिना किसी देश अथवा राष्ट्र का विकास नहीं हो सकता।

अटल आदर्श ग्राम योजना के तहत उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में बिजली, पानी, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएंगी ताकि गांवों का विकास हो। जब गांव विकसित हो जाएंगे तो जाहिर है कि वहां से खुद ही पलायन रूक जाएगा। इसके साथ ही किसानों की माली हालत भी सुधर जाएगी।

राज्य के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक, सामाजिक तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण अब तक ग्रामीण क्षेत्र विकास की मुख्य धारा में शामिल नहीं हो सके हें। यही सोचकर आदर्श गावों का विकास शुरू किया गया है।

अटल आदर्श ग्राम योजना के पहले चरण में 670 न्याय पंचायत मुख्यालयों को चुना गया है। योजना के तहत इन पंचायत मुख्यालयों के तहत ग्रामीण इलाकों में सभी जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगीं।

योजना का मुख्य उद्देश्य चुने गए गांवों में स्कूल, आंगनबाडी, विद्युतिकरण और निर्बल वर्ग आवास के अलावा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका छात्रावास, ग्रामीण बाजार, संग्रहण केन्द्र, कृषि निवेश, भंडार बैकिंग सुविधा, इंटरनेट आधारित सामुदायिक सेवा केन्द्र और दुग्ध संग्रहण एवं विपणन केन्द्र भी स्थापित किए जाएगें।

योजना में घराट एवं अन्य वैकल्पिक ऊर्जा कार्यक्रम पर्यटन ग्राम योजना आयुष ग्राम मत्स्य पालन के लिए बहते पानी की व्यवस्था प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन केन्द्र औदयोगिक नर्सरी तथा वन निगम संग्रहण केन्द्र आदि का विकास भी शामिल है।

अटल गांवों के रुप में चयनित गांवों में योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को संबंधित विभागों से जोड़ा गया है। सभी संबंधित विभागों द्वारा योजना के लिए धन की व्यवस्था का बजट में प्रावधान है।

राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में परियोजना संचालन समिति और ग्राम विकास विभाग नोडल विभाग तथा जिला स्तर पर जिलाधिकारी इस योजना के नोडल अधिकारी होगें। ग्राम विकास राज्यमंत्री हर पन्द्रह दिन में इस योजना की समीक्षा करेंगे।

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