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शहर की कई कालोनियों में प्रदूषित पानी की आपूर्ति

एक तरफ जहां कई कॉलोनियों के लोग प्रदूषित पानी से त्रस्त हैं वहीं अधिकारी शहर में मिनरल वाटर जैसे पानी की आपूर्ति का दावा कर रहे हैं। पुराने शहर के लगभग सभी मोहल्लों में बरसात में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर रहे। हुडा के कई सेक्टरों में यह समस्या अब भी बरकरार है। बसई ट्रीटमेंट प्लांट से शहर में प्रतिदिन 18 करोड़ लीटर यानी 40 मिलियन गैलन पानी आता है। इस पानी को जनस्वास्थ्य विभाग और हुडा का जल विभाग लोगों के घरों तक पहुंचाता है। बसई ट्रीटमेंट प्लांट के अधिकारी सुभाष पिपलानी बताते हैं कि पिछले दिनों कई हिस्सों में बाढ़ आने के कारण नहर में गंदा पानी आ रहा था। पानी में घुली चिकनी मिट्टी को लाख कोशिशें के बावजूद हटा नहीं पा रहे थे। इसकारण पानी थोड़ा गंदा लग रहा था। हमारे पास 24 घंटे का लैब है और पानी डब्लूएचओ के मानकों के आधार पर साफ कर यहां से सप्लाई किया जाता है। स्थानीय स्तर पर टैंकों में अगर मिट्टी आदि जमा होगी तो वह पानी में मिल सकती है। हुडा के कई सेक्टरों में शिकायत मिलने पर जांच की गई, लेकिन पानी में किसी तरह की गड़बड़ी का मामला सामने नहीं आया है।  जनस्वास्थ्य व्भिाग के एक्सइन प्रदीप कुमार के अनुसार पिछले दिनों बाढ़ के कारण नहर से ही गंदा पानी आ रहा था। जिसने हमारे फिल्टरों को भी चोक कर दिया था। हमने क्लोरिन आदि डालकर साफ करने की कोशिश की है। अब नहर से गंदा पानी नहीं आ रहा है। हमारे पास पानी की जांच के लिए लेबोरेटरी है। प्रति माह लगभग 80 से 90 सैंपलों की जांच हम कर लेते हैं। अधिकारी अगर कोइ्र व्यक्ति शिकायत लेकर आता है कि उसके इलाकें का पानी प्रदूषित है। लोगों ने अवैध रूप से पानी और सीवर के कनेक्शन ले रखे हैं। इनमें जल्दी लीकेज आ जाती है। सीवर का पानी पीने के पानी में घुल जाता है। हमने शहर की पाइप लाइन बदलने के लिए 160 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया है। हालांकि जलापूर्ति नगर निगम के अधीन जाने वाली है।

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