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कश्मीरी युवाओं के लिए नई रणभूमि बना इंटरनेट

कश्मीरी युवाओं के लिए नई रणभूमि बना इंटरनेट

सुरक्षा बलों की गोलीबारी में नागरिकों की मौत के विरोध में होने वाले हिंसक प्रदर्शनों से न केवल कश्मीर घाटी की सड़कें जल रही हैं, बल्कि नाराज युवा इंटरनेट के जरिए भी अपनी भावनाएं दर्ज करा रहे हैं।

पंद्रह से 25 वर्ष की आयु के युवा कथित मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ अपने गुस्से को अपने निजी या सामुदायिक इंटरनेट पेज पर अभिव्यक्त कर रहे हैं। घाटी की नाराज युवा पीढ़ी के लिए फेसबुक, ऑरकुट, यू-ट्यूब जैसी कई सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स नई रणभूमि में तब्दील हो गई हैं।

सात सप्ताह से भी कम समय में सुरक्षा बलों की गोलाबारी में करीब 50 लोग मारे गए हैं। इंटरनेट पर इसके खिलाफ कई आवाजें उठ रही हैं। एक अज्ञात उपभोक्ता ने इंटरनेट पर एक सामुदायिक पेज 'आई प्रोटेस्ट' बनाया है। इससे 2,500 से ज्यादा सदस्य जुड़े हुए हैं। इनमें कश्मीरी और गैर-कश्मीरी युवा शामिल हैं। इस विरोध प्रदर्शन को इस तरह से समझाया गया है, ''भारतीय कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय जागरूकता पैदा करने के लिए एक अभियान।''

इस पेज पर लिखा है, ''मैं मेरे साथ एक वस्तु के समान किए जा रहे व्यवहार व 21वीं सदी के उदय पर एक गुलाम जैसे व्यवहार का विरोध करता हूं। मैं बुनियादी मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान मारे जाने का विरोध करता हूं।''

इंटरनेट अभियान से जुड़े एक सदस्य ने 'आई प्रोटेस्ट' पेज पर लिखा है, ''सरकार लोगों के साथ संवाद करने और बिना रोक-टोक के हो रहे इस नरसंहार को रोकने में विफल रही है। बड़ी उम्मीदों के साथ चुनी गई इस सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। दुख की बात है कि इस सरकार ने अपना समर्थन और भरोसा खो दिया है।''

ऐसे ही एक अन्य इंटरनेट पेज 'आई प्रोटेस्ट द एट्रोसिटीज ऑन कश्मीरीज' से 2,100 से ज्यादा सदस्य जुड़े हैं।
'कश्मीर डिस्पैच' नाम से शुरू हुआ एक न्यूज पोर्टल वहां की ताजा स्थिति की पल-पल की जानकारी देता है और खबर से संबंधित तस्वीरें भी उबलब्ध करा रहा है। इससे 5 हजार से ज्यादा सदस्य जुड़े हुए हैं।

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