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हिरोशिमा त्रासदी की बरसी पर पहली बार शामिल हुआ अमेरिका

हिरोशिमा त्रासदी की बरसी पर पहली बार शामिल हुआ अमेरिका

परमाणु बम की त्रासदी को सर्वप्रथम झेलने वाले शहर जापान के शहर हिरोशिमा में आयोजित इस घटना की 65वीं बरसी में शुक्रवार को अमेरिका भी शामिल हुआ।

वर्ष 1945 में छह अगस्त की सुबह आठ बजकर 15 मिनट पर अमेरिकी बमवर्षक इनोला गे ने परमाणु बम (लिटिल ब्वाय) हिरोशिमा पर गिराया था। इस हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवदेना जाहिर करते हुए ठीक इसी समय पर लोगों ने एक मिनट के लिए अपनी दिनचर्या रोक दी।

इस हमले के कारण एक लाख चालीस लोगों की मौत हो गई थी, जबकि शहर की कुल आबादी ही तीन लाख पचास हजार ही थी। इस हमले के तीन दिन बाद यानि नौ अगस्त को अमेरिका ने जापान के दूसरे समृद्ध शहर नागासाकी पर फिर परमाणु बम गिराया और एक बार फिर जनसंहार हुआ। इस घटना के छह दिन बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया और दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति हुई।

हिरोशिमा के नगरप्रमुख ने शुक्रवार के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे विश्व से परमाणु हथियारों को मिटाना बहुत आवश्यक है। अमेरिका ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहली बार अपने प्रतिनिधि को भेजा।

इस मौके पर इस विभीषिका में जीवित बचे नागिरक टोमिको माटसुमोटो (78) ने कहा कि हम चाहते हैं कि परमाणु निरस्त्रीकरण हो और अमेरिका ऐसा कदम उठाता है तो शेष विश्व भी इसका पालन करेगा। उन्होंने कहा कि पहले वह अमेरीकियों से नफरत करते थे, लेकिन वह चाहते हैं कि विश्व में परमाणु अप्रसार हो।

इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासिचव बान की मून भी मौजूद थे। ऐसा पहली बार हुआ है कि हिरोशिमा में आयोजित कार्यक्रम में संरा. महासिचव भी उपिस्थत हों। इसके अलावा जापान के प्रधानमंत्री नाओटो कान भी मौजूद थे।

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