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वॉयस ब्लॉगिंग बोले तो...

विराट रूप धारण करती ब्लॉगिंग की दुनिया में अब बढ़ने लगा है वॉयस ब्लॉगिंग का दबदबा। अभी यह थोड़ा खर्चीला जरूर है पर मन भाये तो खर्चे पर कौन जाए। आखिर कभी अमिताभ बच्चन तो कभी लारा दत्ता, माधवन या जॉन अब्राहम की आवाज़ का लुत्फ उठाने से कोई क्यों चूके? लोकप्रियता और कमाई के संग यह बोलता ब्लॉग सबको खूब भा रहा है


आवाज की नई दुनिया में आप का स्वागत है। ‘वॉयस ब्लॉगिंग’ की दुनिया। अभी तक आप ब्लॉग लिखते हैं, माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के जरिए 140 अक्षरों में अपनी बात कहते हैं, सेलेब्रिटी को फॉलो कर उनके दिल की बात जानते हैं, फेसबुक-ऑकरुट जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर स्टेटस अपडेट कर अपना हाल दुनिया को बताते हैं या अपने दोस्तों-परीचितों का हाल जानते हैं। लेकिन, अब ब्लॉगिंग की दुनिया में मीठी आवाज का रस घुलना शुरू हो गया है।
तो आइए पहले समझ लें कि वॉयस ब्लॉग है क्या? सीधे शब्दों में तो यह ब्लॉगिंग से वॉयस यानी आवाज का जुड़ना है। खास बात यह है कि वॉयस ब्लॉगिंग बिना इंटरनेट के परवान चढ़ रही है। नेट पर बनाए ब्लॉग पर भी आवाज का समावेश किया जा सकता है। उस वॉयस पोस्ट को पोडकास्ट कहा जाता है। लेकिन, वॉयस ब्लॉगिंग में लोग मोबाइल फोन के जरिए अपनी आवाज में ब्लॉगिंग कर रहे हैं। क्या आम और क्या खास - अपनी आवाज में ब्लॉगिंग में सभी को मजा आ रहा है। सेलेब्रिटी के लिए यह मजा चौगुना है, क्योंकि इससे वो न केवल अपने प्रशंसकों से सीधे अपनी आवाज में संवाद करते हैं, बल्कि कंपनियां उन्हें ऐसा करने के लिए मोटी रकम भी दे रही हैं। नतीजा है कि अमिताभ बच्चान से लेकर लारा दत्ता और इमरान हाशमी से लेकर सोनू निगम तक तमाम हस्तियां वॉयस ब्लॉगिंग कर रही हैं।
वैसे, भारत में वॉयस ब्लॉगिंग की शुरुआत 2007 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान हो गई थी, जब नजारा टैक्नोलॉजी ने सचिन जोन बनाया था, जिसमें फॉलोअर्स एक खास नंबर डायल कर सचिन की जिंदगी और खेल से जुड़े तमाम पहलुओं को खुद उनकी जुबानी सुन सकते थे। लेकिन, ग्राहकों को एक तरफ तो हर महीने इसका 30 रुपये किराया देना होता था, वहीं सचिन तेंदुलकर की आवाज सुनने के लिए 6 रुपये प्रति मिनट भी चुकाने होते थे, लिहाजा सचिन का वॉयस ब्लॉग उस वक्त चल नहीं पाया। लेकिन तीन साल के भीतर वक्त बदल गया। कंपनियों ने अपनी रणनीति में बदलाव लाया और वॉयस ब्लॉगिंग से ढेरों सेलेब्रिटी जोड़कर इसमें मुनाफे की नयी संभावना
खोज ली।

वॉयस ब्लॉगिंग एक लिहाज से ट्विटर का ऑडियो अवतार है। ट्विटर संदेश की तरह वॉयस पोस्ट भी छोटे होते हैं। करीब 40 सेकेंड से 1 मिनट तक के। लेकिन, यहां उपयोक्ता आवाज की वजह से लोगों को पहचान सकता है। किसी सेलेब्रिटी को वॉयस ब्लॉग पर फॉलो करने के लिए ब्लॉग प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाले से एक एक्सेस कोड लेना होता है। एक बार सूचीबद्घ होने पर एक वॉयस मैसेज मिलता है, जिसके बाद वह नंबर डायल कर पोस्ट को सुना जा सकता है।

आम लोग अपना वॉयस ब्लॉग आसानी से बना सकते हैं। एक बार उपयोक्ता अपना मैसेज रिकॉर्ड कर दे तो उसके फॉलोअर्स जब चाहें सुन सकते हैं। वॉयस ब्लॉगिंग की शुरुआत करने के लिए उपयोक्ता को मोबाइल फोन में एक शॉर्ट कोड डालकर अपना संदेश रिकॉर्ड करना होता है। किसी वॉयस ब्लॉगर को फॉलो करने के लिए उपयोक्ता को उसका फोन नंबर फीड करना होता है।
वॉयस ब्लॉग के फॉलोअर्स को नई पोस्ट आने पर एसएमएस के जरिए सूचना मिलती है। नए यूजर्स के लिए इसमें निर्देश भी होते हैं। खास बात यह कि वॉयस ब्लॉग शुरू करने के लिए किसी एप्लीकेशन को डाउनलोड करने की जरुरत नहीं है। एयरटेल के वोकल ब्लॉग का उदाहरण लें तो उपयोक्ता को किसी सेलेब्रिटी को फॉलो करने के लिए उसका ‘शॉर्ट कोड’ डायल करना होगा। मसलन, अमिताभ बच्चन को फॉलो करने के लिए ‘5000’ और अपने किसी दोस्त को फॉलो करने के लिए ’फोन नंबर’। अपना निशुल्क वॉयस ब्लॉग शुरू करने के लिए ‘7’ डायल कर निर्देशों का पालन करें।  भारती एयरटेल से लेकर और यूटीवी और नजारा टैक्नोलॉजी जैसे कई बड़ी कंपनियां वॉयस ब्लॉगिंग की सुविधा मुहैया करा रही हैं। लेकिन, ज्यादातर कंपनियों को सही मायने में तकनीकी मदद अमेरिकी कंपनी बबल मोशन से मिल रही है, जिसने अमेरिका के बजाय भारत में अपनी तकनीक लॉन्च की।
वॉयस ब्लॉगिंग की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि बबल मोशन की वॉयस ब्लॉगिंग फोन सेवा (बबली) को भारत में फरवरी में लॉन्च किया गया था। छह महीने से भी कम वक्त में कंपनी 12 लाख से अधिक ऐसे ग्राहक जोड़ चुकी है, जो शुल्क देकर सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। बबल मोशन हर हफ्ते करीब एक लाख नए ग्राहक जोड़ रही है। गौरतलब है कि सेलेब्रिटी को फॉलो करने के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर ग्राहकों से 10 से 30 रुपए वसूल रहे हैं।  वैसे, बात सिर्फ वॉयस ब्लॉगिंग की नहीं है। मोबाइल फोन की ताकत यानी आवाज को आधार बनाकर तमाम सेवाएं इन दिनों बाजार में लॉन्च हो रही हैं। इंडिया टाइम्स ने हाल में मोबाइल उपयोक्ताओं के लिए हाईबडी (hibuddy) नाम से वॉयस सोशल नेटवर्किंग और वॉयस ब्लॉगिंग सेवा शुरू की है। मोबाइल पर ऑडियो मैसेज प्रसारित करने वाले कुछ खास एप्लीकेशन भी खासे लोकप्रिय हैं। इनमें रॉकेटक शामिल है। रॉकेटक के जरिए लोग न केवल अपने समूह में वॉयस मैसेज भेज सकते हैं, बल्कि वीडियो भी भेज सकते हैं। ज्योतिष के क्षेत्र में काम कर रही एस्ट्रोर्केप डॉट कॉम द्वारा निर्मित ऑडियो कंटेंट भी रॉकेटक के जरिए सुना जा सकता है।
आवाज का अपना असर होता है और इस बात को कंपनियां अब अच्छी तरह समझ रही हैं। इसके अलावा भारत में इंटरनेट उपयोक्ताओं की संख्या अभी करीब आठ करोड़ है, जबकि मोबाइल फोन ग्राहकों की संख्या 50 करोड़ पार कर चुकी है।
इंटरनेट की सुविधा भी अभी हर जगह नहीं पहुंची है। इसी का नतीजा है कि सेलेब्रिटी के वॉयस ब्लॉग फॉलो करने वाले अधिकांश लोग बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे हिन्दी पट्टी के हैं। फिर, सोशल नेटवर्किग और ब्लॉगिंग के बारे में मुख्यधारा के मीडिया में इतना कुछ लिखा-सुना जा रहा है कि हर आदमी इससे जुड़ना चाहता है। मोबाइल फोन के जरिए वॉयस ब्लॉगिंग और सोशल नेटवर्किंग उनकी इसी इच्छा को पूरा करता है। लेकिन, वॉयस ब्लॉगिंग के फैलते संसार के बीच आम आदमी के दिल की बात भी शिद्दत से बाहर आनी चाहिए वरना सिर्फ सेलेब्रिटी ही वॉयस ब्लॉगिंग की पहचान बनकर रह जाएंगे। 

वीडियो ब्लॉगिंग : दूर की कौड़ी
वीडियो ब्लॉगिंग का कॉन्सेप्ट भारत ही क्या पूरी दुनिया में अभी नया है और यह अभी ज्यादा प्रचलन में नहीं आया है। संक्षेप में इसे व्लॉगिंग या विडब्लॉगिंग भी कहा जाता है। दरअसल, जिस तरह से ब्लॉगिंग में लिखित सामग्री का और वॉयस ब्लॉगिंग में आवाज का इस्तेमाल किया जाता है, उसी तरह व्लॉगिंग का माध्यम में वीडियो का उपयोग किया जाता है। विदेशों में कई टेलीविजन स्टेशन अधिक दर्शकों तक पहुंचने के लिए आज-कल ब्लॉगिंग का सहारा ले रहे हैं। भारत में थ्री-जी मोबाइल सेवा के प्रसार के साथ जैसे-जैसे मोबाइल फोन पर तेज इंटरनेट आसानी से उपलब्ध होगा, वीडियो ब्लॉगिंग भी रफ्तार पकड़ेगी। वैसे, बबलमोशन इस दिशा में बड़ी पहल की तैयारी कर रही है।

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