DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फ्री और लीज होल्ड

रियल इस्टेट के संबंध में फ्री और लीज होल्ड शब्द काफी अहम हैं। यह दोनों शब्द किसी संपत्ति की स्थिति को दर्शाते हैं। फ्री होल्ड प्रॉपर्टी से आशय उस संपत्ति से है जिस पर अनिश्चित काल के लिए खरीदार का हक होता है। दूसरी ओर लीज होल्ड का आशय ऐसी संपत्ति से है जिस पर खरीदार का हक एक निश्चित समय के लिए होता है। अमूमन यह समय कुछ दशक और शताब्दियों का होता है।

फ्रीहोल्ड सौदे में विक्रेता द्वारा संपत्ति का शीर्षक या मालिकाना हक सेल डीड के जरिए खरीदार को हस्तांतरित कर दिया जाता है। खरीदार संपत्ति को आगे भी हस्तांतरित कर सकता है। वहीं लीज होल्ड में संपत्ति का अधिकार प्रथम मालिक के पास ही होता है, जो खरीदार को एक अनुबंध के जरिए कुछ खास समय के लिए दिया जाता है। ऐसी स्थिति में उस निश्चित अवधि के पूरा होने पर तकनीकी रूप से संपत्ति का मालिकाना हक प्रथम  मालिक के पास रहेगा। हालांकि लीजहोल्ड के तहत आपको संपत्ति को अपने नाम से रजिस्टर्ड कराना होता है। लीज की अवधि पूरी होने के बाद खरीदार उसे दोबारा अपने नाम से नवीकरण करा सकता है।

कोऑपरेटिव सोसायटी के आने के बाद लीजहोल्ड का चलन सामने आया। भूमि पर अधिकार और नियामक की कमी के कारण भूमि अधिग्रहण और दुरुपयोग बढ़ गया था, जिसे दूर करने के लिए सरकार ने भूमि को वैयक्तिक अधिकार में न देते हुए उसे वेलफेयर एसोसिएशन के जरिए कार्य करने का रास्ता निकाला। इन वेलफेयर सोसायटी में आज भी कुछ के अपने नियम होते हैं, जिसका पालन करना सदस्यों के लिए अनिवार्य होता है। अधिकतर ये सोसायटी लीजहोल्ड पर होती हैं। यही कारण है कि लीज होल्ड संपत्ति को बेचते समय पहले आपको वेलफेयर एसोसिएशन से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है।

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:फ्री और लीज होल्ड