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1990 के दशक जैसे दिन नहीं देखना चाहते : प्रणब

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 1991 में देश में धन की कमी के कारण सोना गिरवी रखने की नौबत आने के दिनों को याद करते हुए ईंधन कीमतों में वृद्धि के फैसले का बचाव किया।

राज्य सभा में महंगाई पर बहस के दौरान उन्होंने कहा कि देश में लोकप्रियता के आधार पर फैसले जारी नहीं रखे जा सकते और देश को वित्तीय खतरे में नहीं डाला जा सकता।

वर्ष 1991 में सरकार ने 60 करोड़ डॉलर का ऋण लेने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास 47 टन और बैंक ऑफ स्विटजरलैंड के पास 20 टन सोना गिरवी रखा था।

मुखर्जी ने कहा, ''मैं 1990 के उन दिनों को कभी भूल नहीं सकता जब केवल कुछ हजार डॉलर का ऋण पाने के लिए देश का सोना विदेशी बैंकों में गिरवी रखा गया था। उस समय जब इस विशाल देश के वित्त मंत्री एक धनी देश के वित्त मंत्री से मिलने गए थे तब वहां उन्हें वित्त मंत्री से मिलने के लिए समय मांगना पड़ा था।''

''मैं भविष्य में वित्त मंत्री रहूं या नहीं, मैं नहीं चाहता कि इस देश के किसी भी वित्त मंत्री को वैसी अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़े।''

मुखर्जी ने ईंधन कीमतों में वृद्धि के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार महंगाई कम करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि महंगाई कम करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर प्रयास करना होगा। यदि प्रदेश की सरकारें अपना काम ठीक तरह से नहीं करेंगी तो केवल केंद्र सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता।

मुखर्जी ने कहा, ''बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई देश 6.6 प्रतिशत के भारी राजकोषीय घाटे को जारी रख सकता है। क्या हमें वापस 2 से 2.5 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे की स्थिति में नहीं लौटना चाहिए?''

 

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